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बुरहानपुर: RTI एक्टिविस्ट और यूट्यूबर पर ब्लैकमेलिंग का केस, ढाई लाख की उगाही, तीनों फरार

बुरहानपुर में दो RTI एक्टिविस्ट और एक यूट्यूबर पर ब्लैकमेलिंग का केस दर्ज। जमीन खरीदार से 10 लाख की मांग और ढाई लाख वसूली का आरोप। तीनों फरार।

Updated at: Sat, 06 Dec 2025, 12:05 AM (IST)
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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक बड़ा ब्लैकमेलिंग केस सामने आया है जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। शाहपुर थाना पुलिस ने दो RTI एक्टिविस्ट और एक यूट्यूबर के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का मामला दर्ज किया है। बुरहानपुर ब्लैकमेलिंग का केस में आरोप है कि इन तीनों ने मिलकर एक व्यापारी से 10 लाख रुपए की मांग की और करीब ढाई लाख रुपए वसूल भी लिए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तीनों आरोपी फिलहाल फरार चल रहे हैं।

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किन लोगों पर लगे हैं आरोप?

पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पहला नाम है लोधीपुरा निवासी यूट्यूबर संजय दुबे (पिता प्रेम कुमार दुबे), दूसरा नाम है बुरहानपुर के मोमिनपुरा निवासी डॉ. आनंद उर्फ सूर्यकांत दीक्षित (पिता लक्ष्मीकांत दीक्षित) और तीसरा नाम है राकेश सईवाल (पिता ओमप्रकाश सईवाल)। यह तीनों काफी समय से स्थानीय स्तर पर सोशल मीडिया और RTI के नाम पर काफी सक्रिय रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

केला ग्रुप के संचालक सुधीर पाटिल (पिता शांताराम पाटिल, निवासी सिरसौदा) ने पुलिस को शिकायत देते हुए पूरा वाकया बताया। सुधीर पाटिल ने बताया कि 11 नवंबर 2024 को उन्होंने ग्राम आसेर में कृषि भूमि खरीदी थी। यह जमीन करीब 0.87 हेक्टेयर थी जिसकी कीमत 48.90 लाख रुपए थी। जमीन की खरीद-बिक्री पूरी तरह से कानूनी तरीके से हुई थी।

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लेकिन इसके बाद शुरू हुआ धमकियों और ब्लैकमेलिंग का सिलसिला। यूट्यूबर संजय दुबे ने राकेश सईवाल और आनंद दीक्षित के साथ मिलकर सुधीर पाटिल को परेशान करना शुरू कर दिया। तीनों ने मिलकर एक प्लान तैयार किया और इस जमीन की डील को लेकर सोशल मीडिया पर झूठी खबरें चलानी शुरू कर दीं।

कैसे वसूले गए ढाई लाख रुपए?

सुधीर पाटिल के मुताबिक, आरोपियों ने उनसे सीधे-सीधे 10 लाख रुपए की डिमांड रखी। धमकी दी गई कि अगर पैसे नहीं दिए तो सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ इतनी खबरें चलाई जाएंगी कि उनका बिजनेस बर्बाद हो जाएगा। डर और परेशानी के चलते सुधीर पाटिल ने पहले चरण में 2 लाख रुपए दे दिए।

लेकिन आरोपियों का पेट नहीं भरा। इसके बाद यूट्यूबर संजय दुबे खुद सिरसौदा पहुंचे और वहां से 50 हजार रुपए और लेकर गए। यानी कुल मिलाकर सुधीर पाटिल से ढाई लाख रुपए वसूल लिए गए। एक मौके पर जब सुधीर पाटिल कोर्ट की पेशी पर जा रहे थे, तब भी आनंद दीक्षित और राकेश सईवाल ने उन्हें रास्ते में रोककर धमकी दी।

कलेक्टर के आदेश और आरोपियों का ड्रामा

दिलचस्प बात यह है कि इसी जमीन के मामले में कलेक्टर न्यायालय से हाल ही में एक फैसला आया था। कलेक्टर ने पट्टे की जमीन बेचे जाने के मामले में एसडीएम भागीरथ वाखला को जमीन के विक्रय को शून्य करने के निर्देश दिए थे।

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जब यह फैसला आया तो आनंद दीक्षित और राकेश सईवाल ने इसका जश्न मनाने के लिए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। कलेक्टर के न मिलने पर उन्होंने जन सुनवाई में जिला पंचायत CEO सृजन श्रीवास्तव को तुलसी का पौधा भेंट किया। यह पूरा ड्रामा इस बात का सबूत है कि ये लोग किस तरह से अपनी छवि बनाने में लगे रहते थे।

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वायरल वीडियो का सच क्या है?

बुरहानपुर ब्लैकमेलिंग केस से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में संजय दुबे पैसे मांगते हुए नजर आ रहे हैं। लेकिन आरोपी संजय दुबे का दावा है कि यह वीडियो AI जनरेटेड है और इसकी जांच होनी चाहिए। हालांकि पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है।

एक और वीडियो भी वायरल हो रहा है जो जिले के चर्चित हकीम हॉस्पिटल वाले मामले से जुड़ा है। यह वीडियो भाजपा कार्यकर्ता महेश सिंह चौहान ने अपने फेसबुक पर पोस्ट किया है। इस वीडियो में भी संजय दुबे हकीम अस्पताल वाले मामले को दबाने के लिए पैसे मांगते हुए दिख रहे हैं।

आरोपियों का काला इतिहास

सूत्रों के मुताबिक, RTI एक्टिविस्ट और प्रेस क्लब अध्यक्ष आनंद दीक्षित और यूट्यूबर संजय दुबे लंबे समय से इसी तरह की ब्लैकमेलिंग करते आ रहे थे। कई लोगों ने उनसे परेशान होकर पैसे दिए लेकिन डर के मारे किसी ने शिकायत नहीं की। लेकिन इस बार उनकी चाल उल्टी पड़ गई।

साल 2020 में कोरोना काल के दौरान भी इन लोगों पर गंभीर आरोप लगे थे। पूर्व RMO डॉक्टर प्रतीक नौलखे के साथ मिलकर इन्होंने लाखों रुपए का भ्रष्टाचार किया था। उस मामले में यह लोग अभी सशर्त जमानत पर बाहर हैं।

आनंद दीक्षित पर सिर्फ ब्लैकमेलिंग ही नहीं बल्कि दुष्कर्म का मामला भी दर्ज है। वहीं यूट्यूबर संजय दुबे पर शराब बिक्री के साथ कई अन्य मामले दर्ज हैं। इससे पहले भी शराब के एक मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा था और अभी वह जमानत पर बाहर हैं। लेकिन बावजूद इसके दोनों अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई

शाहपुर थाना पुलिस ने सुधीर पाटिल की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस फिलहाल तीनों आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। आरोपी फरार हैं और पुलिस उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की कोशिश में लगी है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले की गहराई से जांच की जा रही है। वायरल हुए वीडियोज की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी ताकि सच सामने आ सके। साथ ही पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इन आरोपियों ने और भी किसी के साथ ऐसी ब्लैकमेलिंग की है।

RTI और सोशल मीडिया के नाम पर धंधा

यह मामला एक गंभीर सवाल खड़ा करता है कि कैसे कुछ लोग RTI एक्टिविज्म और पत्रकारिता के नाम पर असल में वसूली का धंधा चला रहे हैं। आनंद दीक्षित खुद को RTI एक्टिविस्ट और प्रेस क्लब अध्यक्ष बताते हैं जबकि संजय दुबे यूट्यूब पर पत्रकार के नाम से सक्रिय हैं।

इन लोगों ने सोशल मीडिया की ताकत को गलत तरीके से इस्तेमाल किया। किसी भी व्यक्ति या व्यापारी के खिलाफ झूठी खबरें वायरल करने की धमकी देकर पैसे वसूले जाते थे। कई लोग अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए पैसे देने को मजबूर हो जाते थे।

लोगों में आक्रोश

बुरहानपुर ब्लैकमेलिंग केस की खबर फैलने के बाद स्थानीय व्यापारी समुदाय में काफी आक्रोश है। कई व्यापारियों का कहना है कि वे भी इन लोगों से परेशान थे लेकिन शर्म और प्रतिष्ठा के डर से चुप रहे। अब जब केस दर्ज हो गया है तो कई और लोग भी सामने आने की तैयारी में हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ये लोग खुद को समाज सुधारक और पत्रकार बताकर लोगों को ब्लैकमेल करते थे। असली पत्रकारिता और RTI एक्टिविज्म का इनसे कोई लेना-देना नहीं था। यह सिर्फ पैसे कमाने का जरिया था।

आगे क्या होगा?

फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है और तीनों आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही आरोपी गिरफ्तार हो जाएंगे। इस मामले में और भी कई खुलासे होने की संभावना है। अगर पुलिस की जांच में यह साबित होता है कि इन्होंने और भी लोगों के साथ ऐसा किया है तो मामला और गंभीर हो सकता है।

यह बुरहानपुर ब्लैकमेलिंग केस सोशल मीडिया के दुरुपयोग की एक गंभीर मिसाल है। यह दिखाता है कि कैसे कुछ लोग अच्छे कामों के नाम पर गलत काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि पुलिस जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार करके कानून के कटघरे में लाएगी और ऐसे लोगों को सबक मिलेगा जो RTI और पत्रकारिता के पवित्र पेशे का गलत इस्तेमाल करते हैं।

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