विज्ञापन
---Advertisement---

डॉक्टरी की आड़ में हैवानियत का खेल: 2900 किलो बारूद, AK-47 और ‘जहर’ वाला डॉक्टर… देश में ‘Doctor Terrorist Module’ का पर्दाफाश

देश में बड़े 'Doctor Terrorist Module' का खुलासा। जम्मू-कश्मीर से सहारनपुर और फरीदाबाद तक फैला नेटवर्क। एक डॉक्टर AK-47 के साथ, दूसरे से 2900 किलो बारूद बरामद। जानें पूरी साजिश।

Edited By: Sameer Mahajan
Updated at: Wed, 19 Nov 2025, 1:23 PM (IST)
Follow Us:
---Advertisement---

Doctor Terrorist Module: आज की ये खबर आपके होश उड़ा सकती है, आपको सन्न कर सकती है। ये कहानी है सफेद कोट के पीछे छिपे काले दिलों की। ये कहानी है उन ‘मसीहा’ कहे जाने वालों की, जो असल में हैवान निकले। एक ऐसी साजिश, जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं।

विज्ञापन

हम और आप डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप मानते हैं। भरोसा करते हैं कि उनकी डिग्रियां, उनकी पढ़ाई, उनकी शपथ… सब इंसानियत को बचाने के लिए है। लेकिन क्या हो जब यही पढ़े-लिखे, ऊंचे दर्जे के डॉक्टर… बम बनाने लगें, AK-47 छिपाने लगें और दुनिया का सबसे खतरनाक जहर तैयार करने लगें?

जी हाँ, देश में एक बहुत बड़े “Doctor Terrorist Module” का भंडाफोड़ हुआ है। ये कोई एक घटना नहीं, बल्कि दो अलग-अलग आतंकी गुटों (जैश-ए-मोहम्मद और ISIS-खुरासान) की एक जैसी साजिश है, जिसमें ‘डॉक्टर’ ही मुख्य मोहरे हैं। एक के पास से 2900 किलो से ज्यादा विस्फोटक मिला, तो दूसरा ‘राइसीन’ नाम का वो घातक जहर बना रहा था, जिसका एक कण भी जान लेने के लिए काफी है।

विज्ञापन

ये पूरी कहानी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है, लेकिन अफसोस… ये 100% सच्ची है। चलिए, परत दर परत इस पूरे नेटवर्क को समझते हैं।

पहला सीन: J&K का वो पोस्टर और ‘चेहरा’ पढ़ने वाला कैमरा

कहानी की शुरुआत होती है जम्मू-कश्मीर से। कुछ दिन पहले, घाटी में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के समर्थन में कुछ पोस्टर लगाए गए। ये आतंक के दौर की वापसी की एक छोटी सी कोशिश थी। पोस्टर लगाने वाले ने सोचा होगा कि रात के अंधेरे में वो बच निकलेगा। शायद वो शख्स भूल गया था कि ये ‘नया कश्मीर’ है।

  • गलती कर बैठा आतंकी: पोस्टर लगाने वाले को शायद ये खबर नहीं थी कि अब जम्मू-कश्मीर में सिर्फ पुराने CCTV कैमरे ही नहीं, बल्कि ‘फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम’ (Facial Recognition System) वाले हाई-टेक कैमरे लगे हैं।
  • टेक्नोलॉजी का कमाल: जैसे ही उसने पोस्टर लगाया, कैमरे ने उसका चेहरा स्कैन कर लिया। एक ही पल में उसकी तस्वीर, उसका चेहरा, उसकी पहचान… सब कुछ सुरक्षा एजेंसियों के डेटाबेस में कैद हो गया।
  • दबोचा गया ‘डॉक्टर‘: कुछ ही घंटों की मशक्कत के बाद जो चेहरा सामने आया, उसने सबको चौंका दिया। ये कोई मामूली भटका हुआ नौजवान नहीं था। इस शख्स का नाम था- डॉक्टर आदिल।

डॉक्टर आदिल: अनंतनाग से सहारनपुर तक का ‘सफेद’ सफर

डॉक्टर आदिल की प्रोफाइल देखिए। जनाब, पेशे से एक MBBS डॉक्टर हैं। मेडिसिन की बाकायदा डिग्री है। वो पहले अनंतनाग के सरकारी अस्पताल में मरीजों का इलाज करता था। लोगों की जानें बचाता था (या शायद बचाने का दिखावा करता था)।

पिछले कुछ हफ्तों से वो जम्मू-कश्मीर से निकलकर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर आ गया था। यहाँ वो एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में बड़े आराम से प्रैक्टिस कर रहा था। मरीजों को देख रहा था, पैसे कमा रहा था और शायद अपनी अगली साजिश की तैयारी भी।

विज्ञापन

लेकिन J&K पुलिस के पास उसका चेहरा था। CCTV फुटेज के आधार पर एक टीम सहारनपुर पहुँची। लोकल पुलिस की मदद से उस प्राइवेट अस्पताल से डॉक्टर आदिल को गिरफ्तार कर लिया गया।

विज्ञापन

ये तो बस शुरुआत थी…

जब आदिल की निशानदेही पर J&K में उसका पुराना लॉकर खोला गया, तो पुलिस की आंखें फटी रह गईं। इलाज करने वाले डॉक्टर के लॉकर से क्या मिला? कोई दवा नहीं, कोई मेडिकल जर्नल नहीं… बल्कि एक AK-47 राइफल।
ये साफ हो गया था कि डॉक्टर आदिल सिर्फ जैश का हमदर्द नहीं, बल्कि एक ट्रेंड आतंकी है।

दूसरा सीन: डॉक्टर आदिल का ‘यार’ और फरीदाबाद का ‘बारूद घर’

गिरफ्तारी के बाद डॉक्टर आदिल से पूछताछ का लंबा दौर चला। जब सख्ती हुई, तो उसने एक और नाम उगल दिया। एक ऐसा नाम, जो इस साजिश को और भी भयानक बना देता है।

उसने नाम लिया ‘मुजम्मिल’ का।

  • दूसरा डॉक्टर: मुजम्मिल भी अनंतनाग का ही रहने वाला है और… जी हाँ, वो भी एक डॉक्टर है।
  • नया ठिकाना: ये डॉक्टर साहब पिछले कुछ दिनों से दिल्ली-NCR में डेरा डाले हुए थे। वो फरीदाबाद (हरियाणा) में रह रहा था।
  • स्टूडेंट’ का मुखौटा: मुजम्मिल ने फरीदाबाद की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ने का नाटक कर रखा था। वो खुद को एक छात्र बताता था, ताकि किसी को शक न हो।
  • किराए का ‘जखीरा‘: उसने फरीदाबाद के धोज गाँव में एक कमरा किराए पर लिया था। वो यहाँ क्या कर रहा था? पढ़ाई? नहीं। वो यहाँ मौत का सामान इकट्ठा कर रहा था।

जब सुरक्षा एजेंसियां डॉक्टर आदिल की दी हुई जानकारी पर फरीदाबाद के उस पते पर पहुँची, तो जो मिला, उसे देखकर बड़े-बड़े अधिकारियों के भी पैरों तले जमीन खिसक गई।

२९६० किलो विस्फोटक: ये कितना होता है?

जरा इस आंकड़े को ध्यान से पढ़िए। मुजम्मिल के ठिकानों से मिला सामान:

  1. पहला ठिकाना (धोज गाँव): एक ही ठिकाने से 360 किलो हाई-ग्रेड विस्फोटक मिला।
  2. दूसरा ठिकाना: एक और ठिकाने से करीब 2600 किलो विस्फोटक बरामद हुआ।

कुल मिलाकर लगभग 3000 किलो (2960 Kg) विस्फोटक!

जरा सोचिए… 2019 के पुलवामा हमले में करीब 80-100 किलो RDX का इस्तेमाल हुआ था और उसने हमारे 40 जवानों की जान ले ली थी। यहाँ तो 3000 किलो विस्फोटक मिला है। ये इतना बारूद है कि इससे पूरी दिल्ली या मुंबई को हफ्तों तक दहलाया जा सकता था। कई ‘पुलवामा’ जैसे हमले किए जा सकते थे।

सिर्फ बारूद नहीं, ‘पूरी फैक्ट्री’ मिली

  • IED (Improvised Explosive Device) बनाने का पूरा सामान।
  • सैकड़ों की तादाद में टाइमर (Timer Devices)।
  • तारों (Wires) का जखीरा।
  • डेटोनेटर (Detonators)।
  • गोलियां, बंदूकें और राइफलें… ये सब तो इन डॉक्टरों के लिए “छोटी-मोटी” चीजें थीं।

ये एक पूरी ‘बम फैक्ट्री’ थी, जिसे दो पढ़े-लिखे डॉक्टर चला रहे थे। इस मामले में अब तक 16 और लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो इन डॉक्टरों की मदद कर रहे थे, सामान पहुँचा रहे थे, और इस “Doctor Terrorist Module” का हिस्सा थे।

तीसरा सीन: ‘जहर’ वाला डॉक्टर… ISIS-K की ‘बायो-टेरर’ साजिश

आप सोच रहे होंगे कि 3000 किलो बारूद से ज्यादा खतरनाक क्या हो सकता है?

जवाब है- जहर। एक ऐसा जहर, जो हवा से भी मार सकता है।

कल ही एक और ‘डॉक्टर’ आतंकी गिरफ्तार किया गया। ये मॉड्यूल जैश का नहीं, बल्कि ISIS-खुरासान (ISIS-K) का है, लेकिन तरीका वही है- ‘पढ़ा-लिखा’ आतंकी।

  • गुनहगार का नाम: डॉक्टर अहमद मोहिउद्दीन सैयद।
  • पता: तेलंगाना का रहने वाला।
  • एक्शन: गुजरात ATS ने इसे दबोचा है।
  • डिग्री: ये जनाब भी डॉक्टर हैं। चीन से MBBS पढ़कर आए थे।

इस डॉक्टर अहमद की साजिश बम और बारूद से दस गुना ज्यादा खौफनाक थी। ये बम नहीं बना रहा था, ये बना रहा था ‘राइसीन’ (Ricin)।

राइसीन: दुनिया का सबसे खतरनाक जहर

अगर आप नहीं जानते कि राइसीन क्या है, तो आपको जानना चाहिए।

  • ये अरंडी (Castor beans) के बीजों से निकलने वाला एक प्रोटीन है।
  • ये इतना खतरनाक है कि इसे ‘कन्वेंशनल वेपन’ (Schedule 1) का दर्जा दिया गया है और इसे बनाना या रखना पूरी तरह बैन है।
  • ये साइनाइड (Cyanide) से भी हजारों गुना ज्यादा जहरीला हो सकता है।
  • कैसे मारता है? अगर इसका एक छोटा सा दाना, एक तिनका भी आपके खाने में, पानी में या किसी भी तरह शरीर में पहुँच जाए, तो मौत पक्की है।
  • हवा से मौत: सबसे डरावनी बात! अगर इसे पाउडर बनाकर हवा में उड़ा दिया जाए और ये आपकी साँसों के जरिए फेफड़ों में पहुँच गया, तब भी बचना नामुमकिन है।

डॉक्टर अहमद मोहिउद्दीन इसी ‘राइसीन’ जहर को भारत में तैयार कर रहा था। उसकी साजिश थी एक ऐसा आतंकी हमला करने की, जिसे कोई देख भी न पाता। वो इसे खाने-पीने की चीजों में मिलाकर या हवा में फैलाकर ‘मास किलिंग’ (Mass Killing) करने की फिराक में था।

सोचिए, एक डॉक्टर जिसे इंसानी शरीर की पूरी समझ है, जिसे पता है कौन सा केमिकल कैसे काम करता है, जब वो आतंकी बनता है तो कितना घातक हो सकता है! वो अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई का इस्तेमाल जान बचाने के लिए नहीं, बल्कि सबसे दर्दनाक तरीके से जान लेने के लिए कर रहा था।

विश्लेषण: आखिर डॉक्टर क्यों बन रहे हैं ‘टेररिस्ट’? ये है नया ‘Doctor Terrorist Module

ये दो अलग-अलग मामले, एक जैश का और एक ISIS का, एक खतरनाक पैटर्न की ओर इशारा करते हैं। आतंकी संगठन अब अनपढ़ या भटके हुए युवाओं पर ही नहीं, बल्कि समाज के सबसे ‘बुद्धिजीवी’ और ‘भरोसेमंद’ तबके, यानी डॉक्टरों पर डोरे डाल रहे हैं।

क्यों डॉक्टरों को चुना जा रहा है?

  1. भरोसे का मुखौटा: एक डॉक्टर पर कोई आसानी से शक नहीं करता। वो किराए पर घर ले सकता है, किसी भी इलाके में आसानी से घूम-फिर सकता है। ‘डॉक्टर साहब’ का चोला उनके लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
  2. केमिकल और लॉजिस्टिक्स तक पहुँच: डॉक्टरों की पहुँच उन केमिकल्स और सामान तक हो सकती है, जो आम आदमी के लिए मुश्किल है। उन्हें पता है कि विस्फोटक या जहर बनाने के लिए ‘प्रीकर्सर’ (कच्चा माल) कहाँ से और कैसे मिल सकता है।
  3. बुद्धि का गलत इस्तेमाल: ये हाई-लेवल पर ट्रेंड होते हैं। ये केमिस्ट्री समझते हैं (राइसीन बनाना, IED बनाना)। ये टेक्नोलॉजी समझते हैं और जानते हैं कि कैसे एजेंसियों की नजर से बचा जाए (हालांकि, वे बच नहीं पाए)।
  4. रेडिकलाइजेशन (कट्टरपंथ): ये दिखाता है कि कट्टरपंथ की जड़ें कितनी गहरी हैं। ये अब सिर्फ मदरसों या गाँवों तक सीमित नहीं है, ये यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज तक पहुँच चुका है। ऑनलाइन मौजूद नफरत और प्रोपेगेंडा इन पढ़े-लिखे शैतानों को जन्म दे रहा है।

हमारा और आपका फर्ज क्या है?

ये खबरें सुनने में बहुत आसान लगती हैं कि ‘आतंकी पकड़े गए’। लेकिन इन्हें पकड़ना कितना मुश्किल है, इसका अंदाजा हम और आप नहीं लगा सकते।

  • देश की सुरक्षा एजेंसियां, राज्य और जिले की पुलिस, ATS के जवान… ये सब अपनी जान हथेली पर लेकर इन शैतानों को पकड़ते हैं।
  • डॉक्टर आदिल को सहारनपुर से पकड़ना, मुजम्मिल के 3000 किलो बारूद के ढेर पर रेड करना, या राइसीन बनाने वाले डॉक्टर को दबोचना… इन ऑपरेशनों में सालों की मेहनत, सटीक इंटेलिजेंस और जान का जोखिम शामिल होता है।

जब हमारी एजेंसियां इतना कुछ कर रही हैं, तो हमारा भी एक फर्ज बनता है। फर्ज… अपने देश प्रेम को सर्वोपरि रखने का।

अगर आपके आस-पास, आपके पड़ोस में, आपके इलाके में…

  • कोई ऐसा शख्स दिखे, जिसकी गतिविधियां संदिग्ध हों।
  • कोई ऐसा किराएदार हो, जो किसी से मिलता-जुलता न हो, लेकिन उसके घर में अजीब-अजीब सामान आता-जाता हो।
  • इंटरनेट पर कोई नफरत फैला रहा हो या आतंक को ‘ग्लोरिफाई’ कर रहा हो।

…तो चुप मत बैठिए।

थोड़ा सा भी संदेह हो, तो इसकी सूचना तुरंत अपनी लोकल पुलिस को दें। आपकी एक छोटी सी सूचना, एक बहुत बड़ी तबाही को रोक सकती है। आपकी गुमनाम कॉल, इन ‘सफेद कोट’ वाले आतंकियों के “Doctor Terrorist Module” को तबाह कर सकती है।

जागरूक रहिए, सतर्क रहिए। क्योंकि ये लड़ाई सिर्फ सेना या पुलिस की नहीं है, ये हम सबकी लड़ाई है।

विज्ञापन

Fact Finding Desk

Fact Finding Desk पर ऐसी टीम काम करती है जो खबरों की दुनिया को करीब से समझती है। हमारे साथ राजनीति, खेल, मनोरंजन, विज्ञान, टेक्नोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करने वाले अनुभवी पत्रकार जुड़े हैं। टीम का फोकस सिर्फ खबरें पहुंचाना नहीं है, बल्कि हर घटना को परखकर उसके मायने भी साफ करना है। हम अपने पाठकों तक सही, सटीक और भरोसेमंद जानकारी सबसे पहले पहुंचाने की कोशिश करते हैं। यही हमारी पहचान है और इसी पर हमारा भरोसा टिका है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Arattai

Join Now

विज्ञापन