मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज से जुड़े शासकीय गांधी स्मृति चिकित्सालय के गायनी विभाग के ऑपरेशन थियेटर में अचानक आग लग गई। इस Rewa Hospital Fire की घटना ने पूरे अस्पताल में हड़कंप मचा दिया और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की कलई खुलकर सामने आ गई।
कैसे लगी आग?
अस्पताल के गायनी विभाग के ऑपरेशन थियेटर में अचानक आग की लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते धुआं पूरे विभाग में फैल गया और अफरातफरी का माहौल बन गया। अस्पताल के स्टाफ और मरीजों के परिजनों में दहशत फैल गई। सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि उस वक्त ऑपरेशन थियेटर में कोई मरीज मौजूद नहीं था। अगर उस समय किसी का ऑपरेशन चल रहा होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
आग लगने की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने तुरंत फायर ब्रिगेड को इत्तिला दी। फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। इस Rewa Hospital Fire की घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन ऑपरेशन थियेटर को काफी नुकसान पहुंचा है।
मरीजों को करना पड़ा शिफ्ट
आग लगने के बाद आसपास के वार्डों में भर्ती मरीजों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया गया। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को भी दूसरे वार्डों में पहुंचाया गया। अस्पताल के डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ ने तत्परता दिखाते हुए सभी मरीजों को सुरक्षित निकाला। हालांकि, इस दौरान मरीजों के परिजनों में काफी घबराहट देखी गई।
फायर सिस्टम पूरी तरह से हुआ फेल
इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की असलियत खोलकर रख दी। Rewa Hospital Fire की इस घटना में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अस्पताल का फायर सेफ्टी सिस्टम पूरी तरह से फेल रहा। आग लगने के बावजूद फायर अलार्म नहीं बजा। फायर एक्सटिंग्विशर भी ठीक से काम नहीं कर रहे थे।
सूत्रों के मुताबिक, गांधी स्मृति चिकित्सालय और संजय गांधी अस्पताल में अभी तक नगर निगम से फायर एनओसी (No Objection Certificate) भी नहीं ली गई है। यह बात और भी गंभीर सवाल खड़े करती है कि आखिर एक बड़े सरकारी अस्पताल में फायर सेफ्टी के नियमों का पालन क्यों नहीं हो रहा है।
शॉर्ट सर्किट की आशंका
अभी तक आग लगने की असली वजह साफ नहीं हो पाई है, लेकिन शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। ऑपरेशन थियेटर में कई तरह की इलेक्ट्रिकल मशीनें होती हैं और किसी वायरिंग में खराबी या ओवरलोडिंग से आग लग सकती है। अस्पताल प्रशासन ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
अधिकारी दे रहे बयान से बचने की कोशिश
Rewa Hospital Fire की इस गंभीर घटना के बाद अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी मीडिया से बचते नजर आए। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज के डीन सुनील अग्रवाल ने हालांकि घटनास्थल का दौरा किया, लेकिन विस्तृत जानकारी देने से बचते रहे। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े करती है। गांधी स्मृति चिकित्सालय रीवा का एक प्रमुख सरकारी अस्पताल है जहां रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में फायर सेफ्टी जैसी बुनियादी सुविधाओं का न होना बेहद चिंताजनक है।
स्वास्थ्य विभाग को अब गंभीरता से इस मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है। सभी सरकारी अस्पतालों में फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाना चाहिए और जरूरी सुरक्षा उपकरण लगाए जाने चाहिए। आज यह हादसा टल गया, लेकिन अगली बार शायद हम इतने भाग्यशाली न हों।
जनता की प्रतिक्रिया
इस Rewa Hospital Fire की घटना के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा है। सोशल मीडिया पर भी लोग अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की निंदा कर रहे हैं। कई लोगों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
रीवा के गांधी स्मृति अस्पताल में लगी आग एक गंभीर चेतावनी है। सरकार को तुरंत सभी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए और जरूरी सुधार करने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
















