मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। यहां एक ब्रांडेड चाय कंपनी के नाम और ट्रेडमार्क का गलत इस्तेमाल करके नकली चाय पत्ती की पैकेजिंग का धंधा चल रहा था। इस ब्रांडेड चाय की फर्जी पैकेजिंग के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गोदाम और फैक्टरी पर छापा मारा है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की सख्त कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के तहत संभाग स्तरीय खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की एक पूरी टीम अपने दलबल के साथ इस फैक्टरी पर पहुंची। संभाग प्रभारी आवासीया के नेतृत्व में चली इस कार्रवाई में इंदौर की चाय पत्ती कंपनी के लीगल एडवाइजर विनायक पाल चंदानी भी मौजूद रहे।
यह छापेमारी अचानक नहीं थी। कंपनी को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि उनके ब्रांड नेम का दुरुपयोग करके नकली पैकेजिंग की जा रही है। ग्राहकों से लगातार ऐसी शिकायतें आने के बाद कंपनी ने खाद्य सुरक्षा विभाग से संपर्क किया और इस ब्रांडेड चाय की फर्जी पैकेजिंग के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
गोदाम में मिला नकली सामान का जखीरा
जब अधिकारियों ने गोदाम की तलाशी ली तो वहां बड़े पैमाने पर नकली पैकेजिंग सामग्री बरामद हुई। गोदाम में चाय पत्ती की पैकेजिंग के लिए तैयार पैकेट मिले, जिन पर असली कंपनी का नाम और ट्रेडमार्क छपा हुआ था। यह साफ तौर पर ब्रांड की नकल और धोखाधड़ी का मामला था।
कंपनी के लीगल एडवाइजर विनायक पाल चंदानी ने मौके पर बताया कि यह सिर्फ व्यापारिक धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं के साथ भी बड़ा फ्रॉड है। ग्राहक सोचते हैं कि वे ब्रांडेड चाय खरीद रहे हैं, लेकिन असल में उन्हें घटिया क्वालिटी की नकली चाय मिल रही है।
दोहरी कानूनी कार्रवाई की तैयारी
इस fake tea packaging की बरामदगी के बाद अब कंपनी दोहरी रणनीति अपनाने जा रही है। पहला, खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया जाएगा क्योंकि यह खाद्य उत्पाद से जुड़ा मामला है। दूसरा, स्थानीय थाने में भी प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
चूंकि यह ब्रांडेड चाय की फर्जी पैकेजिंग और जालसाजी का गंभीर मामला है, इसलिए कंपनी संबंधित आरोपियों के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दायर करेगी। साथ ही, कंपनी ने घोषणा की है कि वह इन आरोपियों के खिलाफ 10 करोड़ रुपये का हर्जाना दावा भी ठोकेगी। यह रकम ब्रांड की साख को पहुंचे नुकसान और व्यापारिक हानि की भरपाई के लिए मांगी जाएगी।
ब्रांड की साख पर असर
किसी भी ब्रांडेड कंपनी के लिए ब्रांडेड चाय की फर्जी पैकेजिंग जैसे मामले बेहद गंभीर होते हैं। जब नकली उत्पाद बाजार में आते हैं तो ग्राहक असली और नकली में फर्क नहीं कर पाते। अगर नकली प्रोडक्ट की क्वालिटी खराब हो तो ग्राहक असली ब्रांड को ही दोष देने लगते हैं, जिससे कंपनी की मेहनत से बनाई साख पर बट्टा लगता है।
इंदौर की इस चाय कंपनी ने बरसों की मेहनत से अपना नाम बनाया है। ऐसे में जब कोई उनके ट्रेडमार्क का गलत इस्तेमाल करता है तो यह सिर्फ व्यापारिक नुकसान नहीं, बल्कि उपभोक्ता विश्वास के साथ भी खिलवाड़ है।
आगे क्या होगा?
अब खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस दोनों जांच करेंगी कि यह नकली पैकेजिंग का धंधा कितने बड़े पैमाने पर चल रहा था। यह भी पता लगाया जाएगा कि कितना माल बाजार में पहुंच चुका है और इस गोरखधंधे में और कौन-कौन शामिल है।
यह मामला यह भी दिखाता है कि छोटे शहरों में भी ऐसे ब्रांडेड चाय की फर्जी पैकेजिंग के अड्डे कैसे चल रहे हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे हमेशा ऑथराइज्ड दुकानों से ही ब्रांडेड सामान खरीदें और पैकेट पर होलोग्राम, बैच नंबर और अन्य सुरक्षा चिन्हों की जांच जरूर करें।
बुरहानपुर में हुई यह कार्रवाई अन्य नकलची धंधेबाजों के लिए भी चेतावनी है कि कानून की नजर उन पर है और जल्द या देर से उन्हें पकड़ा जाएगा।
















