उत्तराखंड। पहाड़ की महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। उत्तराखंड के जखोली ब्लॉक के टाट गांव की महिलाओं ने Mushroom Farming यानी मशरूम की खेती से स्वरोजगार की दिशा में एक सफल कदम उठाया है। ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) की ट्रेनिंग के बाद इन महिलाओं ने मिलकर मशरूम का उत्पादन शुरू किया और पहली ही फसल में तीस किलो से ज्यादा मशरूम उगाकर सबको चौंका दिया है।
कम संसाधनों में स्वरोजगार का सफल प्रयास
दरअसल, ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से आरसेटी संस्थान ने जखोली ब्लॉक के टाट गांव में Mushroom Farming की खास ट्रेनिंग दी थी। इस प्रशिक्षण का मकसद यही था कि कम संसाधनों में भी महिलाएं अपना खुद का रोजगार शुरू कर सकें और घर बैठे पैसे कमा सकें।
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद गांव की महिलाओं ने मिलजुलकर मशरूम उत्पादन की शुरुआत की। उनकी मेहनत रंग लाई और पहली फसल में ही तीस किलो से ज्यादा मशरूम तैयार हो गया। इस सफलता ने न सिर्फ उन्हें खुशी दी बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई।
अब अलग-अलग यूनिट लगा रही हैं महिलाएं
पहली फसल की सफलता के बाद अब गांव की ज्यादातर महिलाओं ने अपनी-अपनी अलग Mushroom Farming यूनिट लगाने का फैसला किया है। यह कदम उनके लिए स्वरोजगार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रहा है। महिलाओं का कहना है कि अब वे घर पर रहकर ही अच्छी कमाई कर सकती हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं।
ग्रामीण महिला पलवी भट्ट ने बताया कि पहले उन्हें नहीं पता था कि मशरूम कैसे उगाया जाता है, लेकिन ट्रेनिंग के बाद सब कुछ आसान लगने लगा। उन्होंने कहा कि अब वे खुद का रोजगार करके आत्मनिर्भर बन रही हैं।
वहीं पार्वती रावत ने कहा कि Mushroom Farming में ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती और इसे घर के किसी भी कोने में आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने अन्य महिलाओं से भी इस काम को अपनाने की अपील की।
महिलाओं का हौसला बढ़ा रहा है प्रशिक्षण
सुशीला देवी ने बताया कि आरसेटी की ट्रेनिंग बेहद फायदेमंद रही। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षकों ने बहुत ही सरल तरीके से मशरूम उत्पादन की हर बारीकी समझाई। अब वे न सिर्फ खुद के लिए बल्कि बाजार में बेचने के लिए भी मशरूम उगा रही हैं।
प्रशिक्षक ने बताई सफलता की कहानी
ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान आरसेटी के प्रशिक्षक वीरेन्द्र बर्त्वाल ने इस सफलता पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि जिस उद्देश्य के साथ यह प्रशिक्षण शुरू किया गया था, वह पूरी तरह सफल रहा है। ग्रामीण महिलाओं ने न सिर्फ Mushroom Farming के गुर सीखे बल्कि उसे व्यावहारिक रूप से लागू करके दिखाया भी।
वीरेन्द्र बर्त्वाल ने बताया कि मशरूम की खेती कम लागत में ज्यादा मुनाफे वाला व्यवसाय है। इसमें बहुत कम जगह और कम पूंजी की जरूरत होती है। साथ ही बाजार में मशरूम की अच्छी मांग भी है, जिससे महिलाओं को अच्छी कमाई हो सकती है।
पहाड़ की महिलाओं के लिए मिसाल
जखोली ब्लॉक की यह पहल उत्तराखंड की दूसरी ग्रामीण महिलाओं के लिए भी एक मिसाल बन गई है। Mushroom Farming जैसे छोटे और कम खर्चीले व्यवसाय से पहाड़ की महिलाएं न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं बल्कि समाज में अपनी एक अलग पहचान भी बना रही हैं।
यह पहल यह साबित करती है कि सही दिशा, सही ट्रेनिंग और थोड़ी सी मेहनत से महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। टाट गांव की महिलाओं की यह कहानी आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल है।
आगे की योजना
महिलाओं का कहना है कि वे अब अपने उत्पादन को और बढ़ाएंगी और स्थानीय बाजारों के साथ-साथ शहरों में भी अपने मशरूम की सप्लाई करने की योजना बना रही हैं। उनका मानना है कि Mushroom Farming से न सिर्फ उनकी आय बढ़ेगी बल्कि गांव के दूसरे लोगों को भी रोजगार मिल सकेगा।
उत्तराखंड सरकार और आरसेटी जैसे संस्थान ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। टाट गांव की यह सफलता इस बात का सबूत है कि सही मार्गदर्शन मिले तो पहाड़ की महिलाएं भी किसी से पीछे नहीं हैं।










