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Farmer Suicide in Maharashtra: धुले में कपास की फसल बर्बाद, किसान ने खेत में की आत्महत्या

Farmer Suicide in Maharashtra: महाराष्ट्र के धुले जिले में लगातार बारिश से कपास की फसल डूब गई। 40 वर्षीय किसान युवराज कोली ने खेत में ही ज़हर पीकर आत्महत्या की। शिरपुर तहसील में 6 दिन में यह दूसरी घटना।

Edited By: Sameer Mahajan
Updated at: Wed, 19 Nov 2025, 2:18 PM (IST)
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हाइलाइट्स
  • धुले में लगातार बारिश से कपास की फसल बर्बाद, किसान ने खेत में आत्महत्या की
  • शिरपुर तहसील में 6 दिन में दो किसानों ने जान दी, गांवों में शोक और आक्रोश
  • सरकार की मदद समय पर न मिलने से किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर

Farmer Suicide in Maharashtra: लगातार हो रही बारिश ने एक और किसान की जिंदगी छीन ली। धुले जिले के शिरपुर तहसील के कुरखली गांव में 40 वर्षीय किसान युवराज काशीनाथ कोली ने कपास की फसल पूरी तरह बर्बाद होते देख खेत में ही ज़हर पीकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।

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कपास की फसल डूबने से टूटा सहारा

युवराज कोली का जीवन पूरी तरह खेती पर आधारित था। इस साल उन्होंने खेत में कपास बोया था। शुरुआत में फसल ठीक-ठाक बढ़ रही थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से हो रही तेज और लगातार बारिश ने सब कुछ चौपट कर दिया। खेत पानी में डूब गया, फूल और फल गिर गए और साफ हो गया कि अब उत्पादन नहीं मिलेगा।

इस हालात में उन पर बढ़ते कर्ज का बोझ और घर-परिवार का खर्च पहाड़ बनकर टूट पड़ा। बेटियों की शादी और रोज़मर्रा की चिंता से परेशान युवराज ने नैराश्य में आकर खेत में ही फवारनी की दवा पी ली और अपनी जान दे दी।

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6 दिन में दो किसानों ने तोड़ा दम

शिरपुर तहसील में यह छह दिनों में दूसरी आत्महत्या है। इससे पहले भाटपुरा गांव के एक और किसान ने कर्ज न चुका पाने की वजह से फांसी लगा ली थी। लगातार हो रही किसान आत्महत्याओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर किसानों को उनकी फसलों का सही मुआवज़ा और समय पर मदद क्यों नहीं मिल पा रही है।

सरकार की योजनाओं पर सवाल

सरकार हर साल फसल बीमा और राहत पैकेज का भरोसा देती है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। समय पर सहायता न मिलने से किसान असहाय हो जाते हैं और आखिरकार आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। गांववालों का कहना है कि युवराज के परिवार को तुरंत आर्थिक मदद मिलनी चाहिए, ताकि उनका घर संभल सके।

गांव में मातम

युवराज को जानने वाले कहते हैं कि वह मेहनती और खुशमिजाज इंसान थे। लेकिन कर्ज और नुकसान की चिंता ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया। उनकी मौत के बाद पूरे कुरखली गांव में मातम पसरा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकार तुरंत मदद का ऐलान करे।

किसान संकट गहराया

महाराष्ट्र में हर साल हजारों किसान कपास और सोयाबीन की फसलों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन कभी बेमौसम बारिश तो कभी दुष्काल जैसी परिस्थितियां उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। इस बार धुले जिले में लगातार हो रही बरसात ने कपास की फसल चौपट कर दी है।
अब एक बार फिर Farmer Suicide in Maharashtra का मुद्दा गहराई से उठ खड़ा हुआ है।

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किसानों को समय पर मदद ही असली राहत

युवराज कोली की आत्महत्या केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के किसानों की असली पीड़ा का आईना है। किसानों की मदद के लिए घोषणाओं से ज्यादा ज़रूरत समय पर राहत पहुँचाने की है।

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Anil Borade

महाराष्ट्र के धूलिया जिले से हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे ज़मीनी हकीकत को उजागर करने वाली पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं और सामाजिक मुद्दों, राजनीति व जनहित से जुड़े विषयों पर गहरी पकड़ रखते हैं। वर्तमान में वे प्रतिष्ठित नेशनल न्यूज़ चैनल भारत 24 में संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे Fact Finding के धूलिया जिला ब्यूरो के प्रमुख भी हैं, जहाँ से वे विश्वसनीय, तथ्यपरक और निष्पक्ष खबरें पाठकों तक पहुंचाते हैं।

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