- शिरपुर पुलिस ने महादेव डोंडवाड़ा में 820 किलो गांजे के पौधे जब्त किए, कीमत 41 लाख रुपये
- 50 वर्षीय राशा पवारा को खेत में रखवाली करते पकड़ा, NDPS Act के तहत केस दर्ज
- पुलिस जांच कर रही है कि अवैध धंधे में और कौन-कौन शामिल है
महाराष्ट्र के धुले जिले के शिरपुर तालुका में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध गांजे की खेती का पर्दाफाश किया है। महादेव डोंडवाड़ा इलाके में छापेमारी के दौरान करीब 820 किलो गीले गांजे के पौधे बरामद किए गए हैं, जिनकी बाजार में कीमत करीब 41 लाख रुपये आंकी गई है। इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया है।
कैसे हुआ खुलासा?
शिरपुर पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि महादेव डोंडवाड़ा गांव के आसपास के इलाके में किसी ने खेत में गांजे की खेती शुरू कर रखी है। इस जानकारी को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई की योजना बनाई। जब टीम मौके पर पहुंची तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। पूरे खेत में गांजे के हरे-भरे पौधे उगाए गए थे।
रंगे हाथों पकड़ा गया आरोपी
छापेमारी के दौरान पुलिस ने राशा पवारा नाम के 50 साल के व्यक्ति को खेत में मौजूद पाया। राशा गांजे के पौधों की निगरानी और रखवाली कर रहा था। पुलिस ने तत्काल उसे हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ में राशा ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की है, हालांकि पुलिस अभी यह जांच कर रही है कि इस अवैध धंधे में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
820 किलो गांजा किया नष्ट
पुलिस टीम ने पूरे खेत से गांजे के पौधों को उखाड़ दिया और उन्हें जब्त कर लिया। कुल मिलाकर 820 किलोग्राम गीले गांजे के पौधे बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, अगर यह माल बाजार में पहुंच जाता तो इससे हजारों लोगों की जिंदगी बर्बाद हो सकती थी। पुलिस ने तुरंत इन पौधों को नष्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी।
41 लाख रुपये का अनुमानित नुकसान
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बरामद किए गए गांजे की बाजार में अनुमानित कीमत करीब 41 लाख रुपये है। यह आंकड़ा गीले गांजे के हिसाब से है। अगर इसे सुखाकर बेचा जाता तो इसकी कीमत और भी ज्यादा हो सकती थी। यह राशि बताती है कि यह कोई छोटा-मोटा धंधा नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा अवैध कारोबार था।
कानूनी कार्रवाई शुरू
शिरपुर पुलिस ने आरोपी राशा पवारा के खिलाफ NDPS Act (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस एक्ट) के तहत केस दर्ज किया है। यह कानून नशीली दवाओं की खेती, उत्पादन, खरीद-फरोख्त और इस्तेमाल को रोकने के लिए बनाया गया है। इस कानून के तहत सजा काफी कड़ी होती है और आरोपी को लंबी जेल की सजा के साथ-साथ भारी जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
जांच अभी जारी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला अभी शुरुआती दौर में है। जांच टीम इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या राशा पवारा अकेला इस काम में लगा था या फिर इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि यह गांजा किस बाजार में और किसके पास बेचा जाना था। साथ ही, खेत की मालिकाना हक की भी जांच की जा रही है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
महादेव डोंडवाड़ा गांव के स्थानीय लोगों ने पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी अवैध गतिविधियां गांव की छवि खराब करती हैं और युवाओं को गलत रास्ते पर ले जाती हैं। लोगों ने मांग की है कि ऐसे सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जो नशे के धंधे में लिप्त हैं।
बढ़ता नशे का कारोबार चिंता का विषय
पिछले कुछ सालों में महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में गांजे की अवैध खेती के मामले बढ़े हैं। किसान दूरदराज के इलाकों में छुपकर इस तरह की खेती करने लगे हैं क्योंकि इसमें मुनाफा ज्यादा है। लेकिन यह न सिर्फ गैर-कानूनी है बल्कि समाज के लिए भी बेहद खतरनाक है। ऐसी खेती से मिलने वाला गांजा युवाओं के हाथों में पहुंचता है और उनकी जिंदगी बर्बाद करता है।
शिरपुर पुलिस की यह कार्रवाई एक सराहनीय कदम है। उम्मीद की जाती है कि आगे की जांच में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होंगे और इस अवैध धंधे में लिप्त सभी लोगों को कानून के कटघरे में लाया जाएगा।












