- नेपानगर में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बाद सियासी घमासान, बीजेपी दफ्तर के सामने प्रदर्शन
- बीजेपी कार्यकर्ताओं की शिकायत पर 12 कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की
- कांग्रेस ने कार्रवाई को राजनीतिक बदला बताया, बीजेपी बोली—कानून से ऊपर कोई नहीं
Nepanagar Political Clash ने अब तूल पकड़ लिया है। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले की नेपानगर तहसील में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी टकराव खुलकर सामने आ गया है। बीजेपी कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद नेपानगर थाना पुलिस ने 12 कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। मामला 8 जनवरी को हुए उस विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसने पूरे इलाके का राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया।
दरअसल, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के विरोध में नेपानगर में प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन सीधे तौर पर नेपानगर स्थित बीजेपी कार्यालय के सामने किया गया, जहां कांग्रेस नेताओं ने सड़क के डिवाइडर पर ‘बेशर्म’ के पौधे लगाए और गंदे पानी से भरी बोतलें लेकर जमकर नारेबाजी की।
बीजेपी दफ्तर के सामने हुआ प्रदर्शन, बढ़ा तनाव
कांग्रेस का यह प्रदर्शन देखते ही देखते विवाद की वजह बन गया। बीजेपी का आरोप है कि बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अंबेडकर चौराहे से मातापुर बाजार तक रैली निकाली और फिर बीजेपी कार्यालय के सामने उग्र प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय की सीढ़ियों पर गंदे पानी की बोतलें रखीं और तीखी नारेबाजी की, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह प्रदर्शन सिर्फ राजनीतिक विरोध नहीं था, बल्कि जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश थी। बीजेपी मंडल अध्यक्ष निलेश महाजन ने नेपानगर थाना प्रभारी ज्ञानु जायसवाल को लिखित शिकायत देकर कांग्रेस नेताओं पर कार्रवाई की मांग की थी।
बीजेपी का आरोप – कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश
बीजेपी मंडल अध्यक्ष निलेश महाजन ने शिकायत में कहा कि जिस भवन के सामने यह प्रदर्शन किया गया, वह पार्टी कार्यालय होने के साथ-साथ बीजेपी के वरिष्ठ नेता मनोज माहेश्वरी का निजी निवास भी है। ऐसे में प्रदर्शन से कानून व्यवस्था बिगड़ने और किसी बड़ी घटना की आशंका पैदा हो गई थी।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच की और तथ्यों को सही पाते हुए 12 कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली।
इन 12 कांग्रेस नेताओं पर दर्ज हुई FIR
पुलिस द्वारा जिन कांग्रेस नेताओं को नामजद किया गया है, उनमें संगठन के बड़े और सक्रिय चेहरे शामिल हैं—
- ग्रामीण कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष जगमीत सिंह जॉली
- शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश सिंह बैस
- मंडलम अध्यक्ष पांडूरंग आमले
- पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सोहन सैनी
- नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि विनोद पाटील
- पूर्व नेता प्रतिपक्ष व पार्षद प्रतिनिधि राजेश पटेल
- पार्षद प्रतिनिधि व मराठा समाज अध्यक्ष राजू दामू पाटील
- युवक कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष राजेंद्र मसाने
- आदिवासी विकास परिषद जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह जमरा
- कांग्रेस नेता आकाश राठौर
- कांग्रेस नेता किशोर राजपूत
- पार्षद प्रतिनिधि पंकज मल्लना
इन सभी पर सार्वजनिक शांति भंग करने और बिना अनुमति प्रदर्शन करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
कांग्रेस का पलटवार – राजनीतिक बदले की कार्रवाई
एफआईआर दर्ज होने के बाद कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है। ग्रामीण कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष जगमीत सिंह जॉली का कहना है कि यह पूरा आंदोलन प्रदेश कांग्रेस के आह्वान पर किया गया था और इसका मकसद इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों पर सरकार का ध्यान खींचना था।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों की लापरवाही से इंदौर में लोगों की जान गई, उन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन जब कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाया और सवाल पूछे, तो नेताओं और कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज कर दी गई। यह साफ तौर पर दोहरा मापदंड है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे जनता की आवाज उठा रहे थे और इस तरह की कार्रवाई से विपक्ष को दबाया नहीं जा सकता।
बीजेपी का जवाब – विरोध के नाम पर कानून तोड़ना बर्दाश्त नहीं
वहीं बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बीजेपी का कहना है कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।
बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस ने जानबूझकर उकसावे वाली हरकतें कीं, जिससे सार्वजनिक शांति भंग हो सकती थी। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह जायज और कानून के दायरे में है।
नेपानगर में सियासी घमासान तेज
Nepanagar Political Clash अब सिर्फ एफआईआर तक सीमित नहीं दिख रहा। जिस तरह दोनों पार्टियां आमने-सामने हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। कांग्रेस जहां इसे जनहित की आवाज दबाने की कोशिश बता रही है, वहीं बीजेपी इसे अनुशासनहीनता और कानून उल्लंघन करार दे रही है।
नेपानगर की राजनीति में यह टकराव अब नए मोड़ पर पहुंच चुका है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे प्रशासन और राजनीतिक दल क्या रुख अपनाते हैं।
















