मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया रेशम केंद्र आज Burhanpur Silk Centre Crisis की सबसे बड़ी मिसाल बनता जा रहा है। करीब 12 साल पहले लाखों रुपये की लागत और सैकड़ों एकड़ जमीन पर स्थापित यह केंद्र अब सरकारी अनदेखी, स्टाफ की कमी और सिस्टम की बेरुखी के कारण बदहाली के दौर में पहुंच चुका है।
जिस योजना से कभी जिले के सैकड़ों किसान जुड़े थे, आज वही योजना दो-चार किसानों तक सिमटकर रह गई है। हालात ऐसे हैं कि रेशम उत्पादन से जुड़ी महंगी मशीनें जंग खा रही हैं और पूरा केंद्र धीरे-धीरे निष्क्रिय होता जा रहा है।
अफसर रिटायर होते गए, रेशम केंद्र भी हाशिए पर चला गया
जब बुरहानपुर में रेशम केंद्र की स्थापना हुई थी, तब यहां पर्याप्त संख्या में अधिकारी और कर्मचारी तैनात थे। वे गांव-गांव जाकर किसानों को शहतूत की खेती, रेशम कीट पालन और उत्पादन का प्रशिक्षण देते थे। खासकर आदिवासी बाहुल्य खकनार ब्लॉक में बड़ी संख्या में किसान इस योजना से जुड़े थे।
लेकिन जैसे-जैसे अधिकारी और कर्मचारी रिटायर होते गए, उनकी जगह नई नियुक्तियां नहीं हुईं। यही से Burhanpur Silk Centre Crisis की शुरुआत मानी जा रही है। धीरे-धीरे प्रशिक्षण बंद हो गया, किसानों से संपर्क टूट गया और केंद्र की गतिविधियां ठप पड़ती चली गईं।
चार साल से बंद यूनिट, 30 से ज्यादा मशीनें हो रहीं कबाड़
रेशम केंद्र में रेशम का धागा तैयार करने वाली यूनिट बीते चार साल से पूरी तरह बंद पड़ी है। इस यूनिट में लगी 30 से अधिक महंगी मशीनें बिना उपयोग के पड़ी हैं, जो अब कबाड़ में तब्दील हो रही हैं।
33 एकड़ में फैले इस रेशम केंद्र का संचालन वर्तमान में केवल एक ऑपरेटिव और दो स्थायी कर्मचारियों के भरोसे किया जा रहा है। न तो किसानों को प्रशिक्षण मिल रहा है और न ही किसी तरह की सरकारी योजनाओं का लाभ। यही वजह है कि Burhanpur Silk Centre Crisis लगातार गहराता जा रहा है।
रेशम केंद्र के ऑपरेटिव देवी सिंह राठौर के अनुसार, इस समय केवल तीन से चार किसान ही रेशम उत्पादन से जुड़े हैं। बीते नौ महीनों में सिर्फ 400 किलो रेशम का उत्पादन हो सका है।
200 किसानों से घटकर 2 किसानों तक पहुंचा उत्पादन
12 साल पहले बुरहानपुर में रेशम केंद्र से जुड़े करीब 200 किसान सालाना 20 से 25 क्विंटल कोया (ककूट) का उत्पादन करते थे। इसी कोया से रेशम तैयार किया जाता था।
लेकिन आज Burhanpur Silk Centre Crisis के चलते यह उत्पादन घटकर महज 5 क्विंटल सालाना रह गया है। रेशम उत्पादन से अब केवल दो किसान ही सक्रिय हैं। स्टाफ की भारी कमी के कारण रेशम तैयार करने की यूनिट भी बंद कर दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शासन समय रहते अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति कर दे, तो एक बार फिर बड़ी संख्या में किसानों को रेशम उत्पादन से जोड़ा जा सकता है और उत्पादन पुराने स्तर तक पहुंच सकता है।
रेशम साड़ी निर्माण से बन सकती है बुरहानपुर की नई पहचान
बुरहानपुर जिला वैसे ही केला उत्पादन और कपड़ा उद्योग के लिए जाना जाता है। जानकारों का मानना है कि Burhanpur Silk Centre Crisis से उबरने के लिए यदि रेशम केंद्र पर गंभीरता से काम किया जाए, तो यहां सिल्क साड़ी निर्माण यूनिट स्थापित की जा सकती है।
शुरुआती दौर में बुरहानपुर से रेशम का धागा तैयार कर महेश्वर स्थित साड़ी निर्माण केंद्र भेजा जाता था। फिलहाल कच्चा रेशम नर्मदापुरम भेजा जा रहा है। यदि बुरहानपुर में ही साड़ियों का निर्माण शुरू हो, तो इससे जिले को देशभर में नई पहचान मिल सकती है और स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
खेतों से गायब हो गए शहतूत के पौधे
रेशम केंद्र की सक्रियता के समय जिले के गांवों में शहतूत के पौधे आम नजर आते थे। किसान रेशम कीट पालन में रुचि लेते थे और इससे उनकी आमदनी भी बढ़ती थी।
लेकिन Burhanpur Silk Centre Crisis के चलते किसानों का भरोसा टूट गया। अब किसानों ने अपने खेतों में शहतूत की खेती बंद कर दी है। फिलहाल शहतूत की खेती केवल रेशम केंद्र की जमीन पर ही नजर आती है, जिसका उपयोग केंद्र में सीमित कीट पालन के लिए किया जा रहा है।
किसानों और कांग्रेस की सरकार से मांग
क्षेत्र के किसानों ने सरकार से मांग की है कि बुरहानपुर के रेशम केंद्र में जल्द से जल्द अफसरों और कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए और इसे दोबारा शुरू किया जाए, ताकि किसान फिर से आत्मनिर्भर बन सकें।
वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि रेशम केंद्र की स्थापना के समय ही भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई थी। कांग्रेस का कहना है कि कमलनाथ सरकार के दौरान रेशम केंद्र को आवंटित 133 एकड़ जमीन में से 100 एकड़ केला अनुसंधान केंद्र के लिए दी गई थी, लेकिन बीजेपी सरकार ने केला बाहुल्य क्षेत्र होने के बावजूद उस पर काम नहीं किया।
कांग्रेस ने साफ किया है कि Burhanpur Silk Centre Crisis को लेकर पूर्व कृषि मंत्री सचिन यादव और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार के माध्यम से विधानसभा में मुद्दा उठाया जाएगा।













