- Dhule Jebapur Gram Panchayat में विकास कामों में गंभीर अनियमितताओं का आरोप।
- Dhule Jebapur Gram Panchayat में ठक्कर बाप्पा योजना के कामों पर सवाल।
- Dhule Jebapur Gram Panchayat में घटिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध।
महाराष्ट्र के धुले जिले के साक्री तालुका स्थित Dhule Jebapur Gram Panchayat एक बार फिर चर्चा में है। वजह है ठक्कर बाप्पा आदिवासी वस्ती सुधार योजना के तहत हो रहा विकास कार्य, जिसे लेकर ग्रामस्थों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। आरोप है कि आदिवासी बस्ती में बनाया जा रहा पावर ब्लॉक रोड पूरी तरह से नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है।
ग्राम पंचायत क्षेत्र में जिस सड़क का निर्माण हो रहा है, वह इलाका काफी वर्दळीचा है। ऐसे में इस सड़क का मजबूत और टिकाऊ होना बेहद जरूरी था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण से पहले जिस तरह की तैयारी होनी चाहिए थी, वह कहीं नजर नहीं आ रही।
नाली के बहते पानी पर डाले जा रहे पावर ब्लॉक
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जहां पावर ब्लॉक रोड बनाया जा रहा है, वहां अभी भी नालियों का पानी बह रहा है। बिना नाली को दुरुस्त किए, बिना पानी निकासी की व्यवस्था किए, सीधे उसी पर पावर ब्लॉक बिछाए जा रहे हैं। ग्रामस्थ इसे “तात्पुरती मलमपट्टी” बता रहे हैं, जो कुछ महीनों में ही उखड़ सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा जो अंदाजपत्रक स्वीकृत किया गया था, उसका पालन कहीं भी होता नहीं दिख रहा। टेंडर की शर्तों के अनुसार पहले नाली निर्माण, फिर सड़क की बेसिंग और उसके बाद पावर ब्लॉक लगने चाहिए थे, लेकिन यहां उलटा ही हो रहा है।
सरपंच का बयान और सवालों की बाढ़
जब इस पूरे मामले में सरपंच से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि “पहले सड़क का काम पूरा करेंगे और बाद में उसी सड़क में नाली डाली जाएगी।” इस जवाब ने ग्रामस्थों को और हैरान कर दिया है। लोगों का कहना है कि अगर बाद में सड़क तोड़कर नाली डाली जाएगी, तो फिर इस निर्माण का मतलब ही क्या रह जाता है?
यही नहीं, ग्रामस्थों का आरोप है कि Dhule Jebapur Gram Panchayat में सरकारी नियमों को खुलेआम नजरअंदाज किया जा रहा है और नागरिकों की सुविधा से ज्यादा उनकी परेशानी बढ़ाई जा रही है।
घटिया दर्जे का काम और भ्रष्टाचार के आरोप
ग्राम पंचायत में हो रहे पावर ब्लॉक के काम को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि ब्लॉक की क्वालिटी बेहद घटिया है और नालियों की हालत पहले से ही खराब है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सब जानबूझकर किया जा रहा है ताकि ठेकेदार और संबंधित लोग “गारेगार मलई” खा सकें।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि वर्तमान सरपंच के अशिक्षित होने का फायदा उठाकर उपसरपंच के पति ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में मनमानी कर रहे हैं। काम की गुणवत्ता से समझौता कर शेष राशि को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।
जांच और कार्रवाई की मांग
ठक्कर बाप्पा आदिवासी विकास योजना आदिवासी समाज के जीवन स्तर को सुधारने के लिए बनाई गई थी, लेकिन Dhule Jebapur Gram Panchayat में इस योजना के तहत हो रहे कामों ने इसकी मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामस्थों ने मांग की है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच करें और यदि भ्रष्टाचार या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर अगर इसी तरह लूट होती रही, तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान आदिवासी समाज को ही होगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।














