Hakimi Hospital death case: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है। लालबाग रोड स्थित हकीमी अस्पताल में एक महिला की मौत के बाद डेढ़ महीने में ही उसके पति की भी संदिग्ध हालात में मौत हो गई। अब परिवार और स्थानीय लोग इस पूरे मामले में CBI जांच की मांग कर रहे हैं। आखिर क्या है पूरा माजरा? आइए जानते हैं विस्तार से।
क्या है पूरा मामला?
11 नवंबर 2025 को हकीमी अस्पताल में वैष्णवी चौहान का गर्भाशय का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन थिएटर में लापरवाही के चलते उनकी असमय मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान मौजूद डॉक्टरों की लापरवाही से यह हादसा हुआ। इस घटना में डॉ. अनुपमा दीक्षित, डॉ. आनंद दीक्षित, डॉ. रेहाना बोहरा, डॉ. मुफज्जल बोहरा और कुछ अकुशल डॉक्टर शामिल थे।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि दो महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी इन डॉक्टरों के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की गई। ना ही परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट दी गई और ना ही मौत का सही कारण बताया गया।
डेढ़ महीने बाद पति की भी संदिग्ध मौत
31 दिसंबर 2025 को वैष्णवी के पति नागेश चौहान की भी उसी अस्पताल परिसर में मौत हो गई। मौत की परिस्थितियां बेहद संदिग्ध हैं। कहा जा रहा है कि मेडिकल इंस्ट्रूमेंट के घाव के चलते उनकी मौत हुई। लेकिन परिजन और गांव वाले बता रही है कि पुलिस का कहना है कि नागेश ने अस्पताल परिसर में आत्महत्या कर ली।
परिवार वालों और गांव जैनाबाद के लोगों का कहना है कि नागेश इतना कमजोर नहीं था। वह अपनी पत्नी की मौत को लेकर हकीमी अस्पताल के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा था और उसका पूरा परिवार साथ दे रहा था। जानने वाले बताते हैं कि नागेश बहुत ही निष्पक्षवादी और हार ना मानने वाला व्यक्ति था। वह आत्महत्या कर ही नहीं सकता।
संदिग्ध है नागेश की मौत
अस्पताल के तीसरे माले पर नागेश की मौत हुई। उनके पास एक बंदूक और धारदार हथियार भी मिला। यह हथियार कहां से आया, यह अभी तक साफ नहीं हुआ। इस घटना में डॉक्टर बोहरा भी घायल हुए और उनका इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है।
आज इस घटना को पूरे 15 दिन हो चुके हैं, लेकिन पुलिस ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। सिर्फ बयान लिए गए हैं। किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई और ना ही किसी को संदिग्ध ठहराया गया।
पुलिस क्या कह रही है?
जब इस पूरे मामले पर एसपी देवेंद्र पाटीदार से बात करने की कोशिश की गई तो पहले उन्होंने फोन नहीं उठाया। व्हाट्सएप पर मैसेज करने के बाद जब फोन लगाया तो उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी टीआई से बात करें।
लालबाग थाना प्रभारी अमित जादौन से जब इस मामले को लेकर बात की गई तो उन्होंने साफ कहा कि फोन पर कुछ भी नहीं बता सकते क्योंकि अभी जांच चल रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बारे में भी उन्होंने कुछ बताने से मना कर दिया और कहा कि आकर मिलें तो सिलसिलेवार बात होगी।
पीड़ित परिवार पर दबाव की बात
ज्ञापन देने के बाद एक बात और सामने आई है कि पीड़ित परिवार पर पहले भी दबाव बनाया जा रहा था और अब भी दबाव बनाया जा रहा है कि इस कहानी को भूल जाएं। उन्हें धमकी दी जा रही है कि कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी की जिंदगी इतनी सस्ती होती है?
CBI जांच की मांग
13 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव और कलेक्टर हर्ष सिंह को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें समस्त सकल हिंदू समाज ने CBI जांच की मांग की है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि हकीमी अस्पताल का लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन पहले ही निरस्त किया जा चुका था, लेकिन अस्पताल पर ताले नहीं लगाए गए। आज भी वहां तीन शिफ्टों में करीब 42 नर्स, वार्ड बॉय और कर्मचारी काम कर रहे हैं।
हिंदूवादी संगठन के नेता प्रियांशु ठाकुर का कहना है कि अगर पुलिस मामले की तह तक नहीं पहुंच पा रही तो इसे CBI को सौंप देना चाहिए।
पहली बार नहीं हुई ऐसी घटना
हिंदू संगठन के नेता अजीत परदेसी बताते हैं कि हकीमी अस्पताल में यह पहली घटना नहीं है। यहां पहले भी कई मरीजों के साथ अत्याचार हुआ है। ऑपरेशन के दौरान कई लोगों ने अपने अंग गंवा दिए हैं तो कई लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है। फिर भी शासन-प्रशासन आंखें मूंदकर बैठा है।
अगर पुलिस ने वैष्णवी की मौत के बाद ही कड़ी कार्रवाई की होती तो शायद आज नागेश जिंदा होते। अब परिवार दोहरी मौत का दर्द झेल रहा है।
सांसद ने क्या कहा?
खंडवा-बुरहानपुर क्षेत्र के सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि वे एसपी से बात करेंगे और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए कहा जाएगा। उन्होंने माना कि मामला गंभीर है और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।
परिवार ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं होती तो परिजन उग्र आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि वैष्णवी चौहान की मौत के दोषियों को कब सजा मिलती है और नागेश चौहान की मौत का खुलासा कब होता है।
आखिर में…
बुरहानपुर के Hakimi Hospital death case ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दो जिंदगियां चली गईं लेकिन अभी तक ना तो कोई गिरफ्तारी हुई और ना ही साफ जवाब मिले। पुलिस की चुप्पी और जिला प्रशासन की लापरवाही ने इस मामले को और संदिग्ध बना दिया है। परिवार को न्याय कब मिलेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
















