मध्य प्रदेश: स्वच्छता में सात आसमान छूने वाले इंदौर की गलियों में आज एक अलग ही हकीकत बह रही है। शहर का Indore Contaminated Water Issue अब सिर्फ एक नागरिक समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। वार्ड 82 से बीजेपी पार्षद कमल बघेला ने अपनी ही नगर निगम (BMC) की कार्यप्रणाली पर जो खुलासे किए हैं, उसने सिस्टम की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है असली विवाद?
मामला शहर के कई वार्डों में नलों से आ रहे गंदे, काले और बदबूदार पानी का है। पार्षद कमल बघेला का दावा है कि उनके वार्ड की जनता लंबे समय से सीवेज मिश्रित पानी पीने को मजबूर है। यह दूषित पानी न केवल बीमारियों का घर बन रहा है, बल्कि स्वच्छता के दावों की पोल भी खोल रहा है।
कहाँ और किसके साथ हो रही नाइंसाफी?
यह समस्या विशेष रूप से इंदौर के वार्ड 82, बिलाला, टीटी नगर और छत्रीपुरा जैसे घने इलाकों में फैली हुई है। यहाँ रहने वाले मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए Indore Contaminated Water Issue जी का जंजाल बन गया है। पार्षद बघेला का कहना है कि वे जनता के प्रतिनिधि हैं, लेकिन जब जनता उनसे पानी के बारे में सवाल करती है, तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता।
कब से लंबित है शिकायत?
‘कब’ वाले सवाल का जवाब काफी चौंकाने वाला है। पार्षद के मुताबिक, यह समस्या पिछले तीन साल (2021 से) लगातार बनी हुई है। उन्होंने दर्जनों बार इंदौर नगर निगम को पत्र लिखे, एमआईसी (MIC) मीटिंग में चिल्लाए, लेकिन नतीजा ‘सिफर’ रहा। बघेला ने सोशल मीडिया पर उन शिकायतों के सबूत भी साझा किए हैं, जो सालों से धूल फांक रही थीं।
क्यों नहीं हुआ अब तक समाधान?
हैरानी की बात यह है कि इंदौर में बीजेपी की ही परिषद है और पार्षद भी बीजेपी के ही हैं। इसके बावजूद सुनवाई न होना अधिकारियों की तानाशाही की ओर इशारा करता है। Indore Contaminated Water Issue का मुख्य कारण ड्रेनेज लाइनों का वाटर पाइपलाइन के साथ ‘क्रॉस-कनेक्शन’ होना है। पाइपलाइन पुरानी हो चुकी हैं और लीकेज की वजह से सीवेज का पानी नलों तक पहुँच रहा है।
कैसे बिगड़े हालात?
हालात तब बेकाबू हो गए जब पिछले कुछ दिनों में इलाके के सैकड़ों लोग बीमार पड़ने लगे। बच्चों में उल्टी-दस्त और बड़ों में स्किन इन्फेक्शन के मामले बढ़ गए। पार्षद बघेला ने जब देखा कि पानी का रंग पूरी तरह काला हो चुका है और अधिकारी अब भी फाइलें घुमा रहे हैं, तब उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने साफ कहा, “अब आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए।”
बीएमसी की कार्रवाई: देर आए पर क्या दुरुस्त आए?
बघेला के कड़े रुख के बाद इंदौर नगर निगम (BMC) के हाथ-पांव फूल गए हैं। निगम आयुक्त ने आनन-फानन में जांच के आदेश दिए हैं। प्रभावित इलाकों में पानी की सैंपलिंग शुरू की गई है और अस्थायी रूप से वाटर टैंकरों की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जिन पॉइंट्स पर लीकेज है, उन्हें युद्ध स्तर पर सुधारा जाएगा।
जनता की उम्मीद: क्या अब जागेगा प्रशासन?
इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता है, लेकिन Indore Contaminated Water Issue यह याद दिलाता है कि ज़मीनी बुनियादी ढांचा अभी भी जर्जर है। जनता को उम्मीद है कि पार्षद बघेला की इस आवाज़ के बाद अब सिर्फ खानापूर्ति नहीं होगी, बल्कि पाइपलाइन बदलने का स्थायी काम शुरू होगा।
सावधानी का संदेश:
जब तक समस्या का समाधान नहीं होता, क्षेत्र के नागरिक पानी उबालकर पिएं और किसी भी तरह की बीमारी महसूस होने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।















