मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। क्रिसमस के मौके पर जहां दुनिया भर में लोग खुशियां मना रहे थे, वहीं बुरहानपुर के खड़कोद गांव में स्थित एक सहजयोग केंद्र अखाड़े में तब्दील हो गया। यहां धर्म परिवर्तन और आस्था के अपमान को लेकर Burhanpur Conversion Row अब गरमा गया है। आरोप है कि केंद्र में मिशनरियों द्वारा हिंदू धर्म के प्रचार के बहाने ईसाई धर्म को बढ़ावा दिया जा रहा था और हिंदू देवी-देवताओं को गलत तरीके से पेश किया जा रहा था।
मामला तब भड़क गया जब हिंदूवादी संगठनों को पता चला कि वहां ईसा मसीह (Jesus Christ) को भगवान विष्णु का अवतार बताकर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। बात सिर्फ यहीं नहीं रुकी, बल्कि प्रसाद के नाम पर अंडे और मांस बांटे जाने की खबर ने आग में घी का काम किया। इसके बाद बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ता वहां पहुंचे और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
क्या है पूरा मामला? (The Inside Story)
यह पूरा विवाद खड़कोद स्थित सहजयोग केंद्र का है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, क्रिसमस के दिन यहां कुछ मिशनरी सक्रिय थे। आरोप है कि वे लोग हिंदू धर्म के वेदों, पुराणों और ग्रंथों का सहारा लेकर अपनी बातें मनवाने की कोशिश कर रहे थे। Burhanpur Conversion Row के चर्चा में आने की मुख्य वजह यह है कि यहां हिंदू धर्मग्रंथों की गलत व्याख्या की जा रही थी।
प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का दावा है कि वहां मौजूद लोगों को यह पट्टी पढ़ाई जा रही थी कि ईसा मसीह असल में भगवान विष्णु के ही स्वरूप हैं। उन्हें यह भी कहा गया कि “अंत में सब एक हैं, लेकिन सबसे ऊपर यीशु ही हैं।” हिंदू संगठनों का मानना है कि यह सब एक सोची-समझी साजिश के तहत हो रहा है, ताकि भोले-भाले हिंदुओं को भ्रमित कर उन्हें अपने धर्म से दूर किया जा सके।
सबसे ज्यादा गुस्सा लोगों में “प्रसाद” को लेकर है। हिंदू धर्म में जहां सात्विक भोजन और प्रसाद का महत्व है, वहीं आरोप है कि इस केंद्र में प्रसाद के तौर पर अंडे और मांस का वितरण हो रहा था। इसे हिंदू आस्था पर सीधा प्रहार बताया जा रहा है।
मौके पर क्या हुआ?
सूचना मिलते ही हिंदू जागरण मंच और बजरंग दल के कार्यकर्ता दल-बल के साथ केंद्र पर धमक पड़े। वहां जो कुछ उन्होंने देखा और सुना, उससे उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। हिंदू संगठन के प्रतिनिधि महेश चौहान ने इस पूरे वाकये पर अपनी बात रखी।
महेश चौहान ने बताया, “हमें कहीं से पक्की खबर मिली थी कि केंद्र पर भगवान विष्णु और श्रीराम जी के बारे में झूठ फैलाया जा रहा है। पहले तो यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब हम वहां पहुंचे तो देखा कि Burhanpur Conversion Row वाली बात सच साबित हो रही है। वहां हमारे धर्मग्रंथों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा था। वे लोग कह रहे थे कि सारे भगवान एक हैं, पर यीशु सबसे महान हैं। यह सरासर गलत है।”
उन्होंने आगे कहा कि अपने धर्म का प्रचार करना गलत नहीं है, लेकिन हिंदू देवी-देवताओं का सहारा लेकर और उन्हें नीचा दिखाकर ऐसा करना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रसाद में अंडे बांटना तो हदों को पार करना है।
विरोध और कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद बुरहानपुर का माहौल गरमा गया है। हिंदू संगठनों ने केंद्र के बाहर जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया। उनकी मांग साफ है—ऐसे लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जो धर्म की आड़ में नफरत या भ्रम फैला रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने मिशनरियों की गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाने की वकालत की है।
महेश चौहान और उनके साथियों ने तय किया है कि वे इस मामले को लेकर चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने ऐलान किया है कि कल वे जिला कलेक्टर और एसपी (SP) से मुलाकात करेंगे और उन्हें ज्ञापन सौंपेंगे।
अब आगे क्या होगा?
हिंदू संगठनों के ज्ञापन में मुख्य रूप से तीन मांगे होने की उम्मीद है:
- खड़कोद और आसपास के इलाकों में चल रही ऐसी मिशनरी गतिविधियों की जांच हो।
- हिंदू देवी-देवताओं के अपमान और धर्म ग्रंथों की गलत व्याख्या करने वालों पर केस दर्ज हो।
- प्रसाद के नाम पर मांसाहार बांटकर धार्मिक भावनाएं आहत करने वालों पर एक्शन लिया जाए।
बुरहानपुर के खड़कोद की यह घटना एक बार फिर धर्मांतरण और धार्मिक दुष्प्रचार के मुद्दे को चर्चा में ले आई है। Burhanpur Conversion Row जैसे मामले न केवल सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा हैं, बल्कि यह प्रशासन के लिए भी एक चुनौती है कि कैसे वे धार्मिक भावनाओं की रक्षा करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखें। अब सबकी निगाहें कल होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।















