महाराष्ट्र के धुळे जिले के जेबापूर इलाके में मंगलवार को dhule protest का एक बड़ा मामला सामने आया। पिंपळनेर नगरपरिषद की ओर से यहां लगातार कचरा डंपिंग किए जाने से परेशान ग्रामीणों और किसानों ने नगरपरिषद की कचरा गाड़ियों को रोककर वापस भेज दिया। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार यहां कचरा फेंके जाने से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है और फसलों को भी भारी नुकसान हो रहा है।
स्वास्थ्य और खेती दोनों पर संकट
जेबापूर गांव के पास पिंपळनेर नगरपरिषद का डंपिंग ग्राउंड बना हुआ है। यहां रोजाना टनों कचरा फेंका जाता है, जिससे इलाके में बदबू और धुएं का माहौल बन गया है। गांववालों का कहना है कि इस कचरे से निकलने वाली दुर्गंध और धुआं सांस लेना मुश्किल कर देता है। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।
वहीं, किसानों की चिंता अपनी फसलों को लेकर है। कचरे से निकलने वाले हानिकारक तत्व और धुआं खेतों में लगी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कई किसानों ने बताया कि उनकी फसलों की पैदावार पर सीधा असर पड़ रहा है और यह उनकी आजीविका का सवाल बन गया है। इसी वजह से आज यह dhule protest देखने को मिला।
ग्रामीणों ने की कचरा गाड़ियों की नाकाबंदी
आज सुबह से ही जेबापूर के ग्रामीणों ने मंगलवार को कड़ा रुख अपनाते हुए नगरपरिषद की कचरा गाड़ियों को रोक दिया और उन्हें वापस जाने के लिए मजबूर किया। गुस्साए ग्रामीणों और किसानों ने साफ कर दिया कि अब वे यहां एक दाना कचरा भी नहीं फेंकने देंगे।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि प्रशासन की लापरवाही से अब उनका जीना मुश्किल हो गया है। उन्होंने मांग की कि या तो कचरा डंपिंग की जगह तुरंत बदली जाए या फिर वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निपटान किया जाए। यह dhule protest पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा लेकिन ग्रामीणों का आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था।
प्रशासन से मांगा जवाब
विरोध के बाद ग्रामीणों ने तुरंत नगरपरिषद के अधिकारियों को फोन करके जवाब मांगा। जेबापूर ग्रामपंचायत के ग्रामसेवकों ने मुख्य प्रशासकीय अधिकारी दीपक पाटील को पूरी स्थिति से अवगत कराया।
इस विरोध पर अधिकारी दीपक पाटील ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि अगले दो से तीन दिनों में कचरे को किसी दूसरी जगह डंप करने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक स्थान की तलाश की जा रही है और जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा। हालांकि, ग्रामीणों को इस आश्वासन पर पूरा भरोसा नहीं है।
1 जनवरी को बड़े आंदोलन की चेतावनी
हालांकि, अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने से ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 1 जनवरी 2025 को कचरा डंपिंग वाली जगह पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
ग्रामीणों ने धमकी दी है कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो आने वाला dhule protest और भी तीव्र होगा। उन्होंने कहा कि वे अपने स्वास्थ्य और अपनी खेती को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह सिर्फ एक या दो लोगों का मामला नहीं है बल्कि पूरे गांव की जिंदगी दांव पर लगी है।
कानून-व्यवस्था बिगड़ी तो प्रशासन होगा जिम्मेदार
आज के इस विरोध के दौरान ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इस मुद्दे को लेकर कानून-व्यवस्था की कोई समस्या पैदा हुई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने कहा कि अब वे अपने अधिकारों के लिए लड़ने को मजबूर हैं और प्रशासन को इसकी गंभीरता समझनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ कचरे का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके जीवन और आजीविका का सवाल है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो dhule protest का स्वरूप बदल सकता है।
बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल
इस विरोध प्रदर्शन में उपसरपंच जयश्री भदाणे, पुलिस पाटील प्रकाश भदाणे, विनोद भदाणे, भाईदास भदाणे, लोटन भदाणे, महेश भदाणे, महेंद्र भदाणे, हेमराज भदाणे, गिरीश भदाणे, शरद अहिरराव, भालचंद्र भदाणे, प्रवीण भदाणे, दिलीप भदाणे, अरुण भदाणे, रावसाहेब भदाणे, किरण भदाणे, जितेंद्र भदाणे, बिपिन भदाणे, राजेंद्र भदाणे और भरत अहिरराव सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण शामिल हुए।
सभी ग्रामीणों ने एकजुट होकर यह संदेश दिया कि अब वे प्रशासन की उदासीनता बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अब उनके अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है।
क्या है पूरा मामला?
यह विरोध तब शुरू हुआ जब पिछले कई महीनों से पिंपळनेर नगरपरिषद जेबापूर के पास के इलाके में लगातार कचरा डंप कर रही है। शुरुआत में ग्रामीणों ने शिकायतें कीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। धीरे-धीरे स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अब गांव में रहना मुश्किल हो गया है।
डॉक्टरों का कहना है कि कचरे से निकलने वाली जहरीली गैसें सांस की बीमारियों का कारण बन सकती हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरनाक है। कई लोगों में खांसी, सांस फूलना और त्वचा संबंधी समस्याएं देखी जा रही हैं।
क्या होगा आगे?
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या का कितनी जल्दी समाधान निकालता है। ग्रामीणों की मांग साफ है – या तो कचरा डंपिंग की जगह बदली जाए या फिर कचरे के निपटान का कोई वैज्ञानिक तरीका अपनाया जाए, जिससे उनकी सेहत और खेती पर कोई असर न पड़े।
1 जनवरी की तारीख नजदीक आ रही है और प्रशासन के पास समय कम है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो धुळे जिले में एक बड़ा dhule protest देखने को मिल सकता है। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि अब उनकी सहनशीलता की सीमा खत्म हो चुकी है और वे अपने हक के लिए लड़ने को तैयार हैं।
















