मध्य प्रदेश के इंदौर में जून से अब तक के लगभग 7 महीनों में इंदौर में चूहा काटने के 1094 मामले सामने आ चुके हैं, जिनका इलाज हुकुमचंद पॉली क्लीनिक में हुआ। यह क्लीनिक शहर में चूहा काटने के ज्यादातर मरीजों के लिए मुख्य सेंटर माना जाता है, इसलिए यह आंकड़ा स्थिति की गंभीरता दिखाता है। हालांकि इन 1094 मामलों में बच्चों की सटीक संख्या अलग से दर्ज नहीं की गई, जिससे बच्चों पर खतरे की वास्तविक तस्वीर साफ नहीं हो पाती।
डॉक्टरों का मानना है कि जो केस दर्ज हुए हैं, असल में संख्या उससे कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई मामूली केस रिपोर्ट ही नहीं होते। खासकर झुग्गी बस्तियों और गरीब बस्तियों में लोग अक्सर अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते और घरेलू इलाज या लोकल क्लीनिक तक ही सीमित रह जाते हैं।
अस्पताल के भीतर मौत तक पहुंचा चूहों का खतरा
इंदौर के एमवाय (MY) अस्पताल में सितंबर 2025 में जो घटना सामने आई, उसने पूरे शहर को हिला दिया। अस्पताल के NICU में भर्ती दो नवजात बच्चों को चूहों ने काट लिया, जिसके बाद दोनों की मौत हो गई। ये बच्चे पहले से ही गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और वेंटिलेटर व विशेष निगरानी में रखे गए थे, ऐसे में चूहों का NICU तक पहुंच जाना सिस्टम की लापरवाही की बड़ी निशानी माना जा रहा है।
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पर सवाल उठने लगे और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई के साथ जांच के आदेश दिए गए। मेडिकल रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया कि मौत की सीधी वजह सिर्फ चूहा काटना नहीं, बल्कि बच्चों की पहले से खराब तबीयत और गंभीर बीमारियां थीं, लेकिन सवाल ये है कि NICU जैसे संवेदनशील वार्ड में चूहे पहुंचे ही कैसे।
घरों से एयरपोर्ट तक, हर जगह चूहे
Indore Rat Bite Cases सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं हैं, चूहों का आतंक पूरे शहर में अलग–अलग रूप में दिख रहा है।
लोग बता रहे हैं कि घरों में रात के समय चूहे खाने की चीजें कुतरने के साथ कई बार सोते हुए बच्चों और बुजुर्गों को भी काट लेते हैं।
होटलों और रेस्टोरेंट्स में किचन एरिया में चूहों की तादाद बढ़ने से साफ–सफाई और हाइजीन पर सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक एयरपोर्ट और कुछ बड़े कॉमर्शियल एरिया के आसपास भी चूहों की संख्या बढ़ने की शिकायतें हैं। ऐसे में शहर की इमेज और टूरिस्ट–ट्रैफिक पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
Regal चौराहा और Shastri Bridge पर खतरा
इंदौर के मशहूर रीगल चौराहे और शास्त्री ब्रिज के आसपास चूहों की वजह से जमीन धंसने और गड्ढे बनने जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
शास्त्री ब्रिज के नीचे सैकड़ों की संख्या में चूहों के बिल मिले, जिन्होंने मिट्टी को अंदर से खोखला कर दिया।
नवंबर 2025 में शास्त्री ब्रिज के पास करीब 5 फीट गहरा गड्ढा बन गया, जिसका कारण भी चूहों की बिल खोदने की गतिविधि को माना गया।
रीगल चौराहे के पास भी जमीन धंसने के मामले ने प्रशासन की नींद उड़ा दी, क्योंकि यह एरिया हमेशा व्यस्त रहता है और यहां से रोज हजारों लोग गुजरते हैं। अगर समय रहते गड्ढों और बिलों को नहीं भरा जाता, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
बच्चों पर खतरा और डेटा की कमी
Indore Rat Bite Cases में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बच्चों पर कितना असर पड़ा, इसका स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं है। हुकुमचंद पॉली क्लीनिक के रजिस्टर में कुल केस तो दर्ज हैं, लेकिन अलग से यह नहीं लिखा कि उनमें कितने बच्चे, नवजात या किशोर शामिल थे।
शहर में थैलेसीमिया, जन्मजात हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कई बच्चे लंबे समय तक अस्पतालों में रहते हैं, जहां चूहों का खतरा और बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इम्यूनिटी कमजोर होने पर चूहा काटने से होने वाला इंफेक्शन ज्यादा खतरनाक हो सकता है, इसलिए बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है।
प्रशासन से क्या उम्मीदें हैं?
लगातार बढ़ते Indore Rat Bite Cases ने अब इस मुद्दे को सिर्फ हेल्थ प्रॉब्लम नहीं, बल्कि सिविक और इंफ्रास्ट्रक्चर क्राइसिस बना दिया है।
नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को मिलकर बड़े स्तर पर पेस्ट कंट्रोल ड्राइव चलाने की जरूरत है, खासकर अस्पतालों, पुलों, चौराहों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में।
सार्वजनिक जगहों के आसपास फैला कचरा, खुले में पड़ी खाद्य सामग्री और नालियों की गंदगी चूहों के लिए आसान ठिकाना बन चुकी है, जिसे तुरंत कंट्रोल करना होगा।
लोगों को भी घरों और दुकानों के आसपास साफ–सफाई रखने, खाने–पीने की चीजें खुली न छोड़ने और चूहा काटने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने जैसी बेसिक सावधानियां अपनानी होंगी। वरना Indore Rat Bite Cases की गिनती कागज़ पर भले 1094 दिख रही हो, जमीन पर हालात इससे कहीं ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।















