operation sindoor पर पाकिस्तान के आर्मी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का बयान पाकिस्तान और भारत, दोनों जगह चर्चा में है। मुनीर ने दावा किया कि मई 2025 में India के साथ हुए सैन्य संघर्ष के दौरान Pakistan को Allah की खास मदद मिली, नहीं तो हालात बहुत ज्यादा बिगड़ सकते थे।
मुनीर ने क्या कहा?
आसिम मुनीर इस्लामाबाद में हुए एक नेशनल उलेमा कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे, जहां उन्होंने कुरान की आयतों का हवाला देते हुए भारत के साथ संघर्ष का जिक्र किया। मुनीर ने कहा कि India के हमलों के दौरान पाकिस्तानी सेना ने Allah की मदद को महसूस किया और इसी वजह से Pakistan एक बड़े नुकसान से बच गया। यह भाषण 10 दिसंबर 2025 को दिया गया था और बाद में इसका वीडियो सामने आया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है।
पाकिस्तानी मीडिया में मुनीर के इस बयान को ऐसे पेश किया जा रहा है, जैसे Pakistan ने बहुत बड़ी आपदा से खुद को बचा लिया हो। लेकिन कई विश्लेषक यह भी कह रहे हैं कि इस तरह के बयान से साफ दिखता है कि operation sindoor में Pakistan को वास्तविकता में कितना भारी नुकसान झेलना पड़ा।
Operation Sindoor कैसे शुरू हुआ?
कहानी की शुरुआत 7 मई 2025 से होती है, जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई, जिसके बाद भारत सरकार पर कड़ा जवाब देने का दबाव बढ़ गया। इसके बाद India ने Pakistan और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ठिकानों और सपोर्ट सिस्टम के खिलाफ एक बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू की, जिसे नाम दिया गया operation sindoor।
यह ऑपरेशन करीब चार दिन तक चला और इस दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की जमीन पर कई महत्वपूर्ण ठिकानों को टारगेट किया। ओपन सोर्स रिपोर्ट्स और मीडिया के मुताबिक, इस ऑपरेशन में Pakistan के 11 एयरबेस को गंभीर नुकसान पहुंचा और उसकी कई एयर डिफेंस प्रणालियां भी निष्क्रिय हो गईं। भारत ने इसे आतंकवाद के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ‘सटीक और सीमित’ कार्रवाई बताया था, न कि किसी देश के खिलाफ फुल स्केल वार।
संघर्ष कैसे रुका?
चार दिन की जबरदस्त टेंशन के बाद अचानक माहौल बदलता दिखा। जानकारी के अनुसार, 10 मई 2025 को पाकिस्तान के DGMO ने भारत से कॉन्टैक्ट किया और संघर्ष को रोकने की अपील की। इसके बाद दोनों देशों के बीच बैक चैनल डिप्लोमेटिक बातचीत हुई और operation sindoor को रोक दिया गया।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि Pakistan जिस तरह का नुकसान झेल चुका था, उसके बाद उसकी क्षमता नहीं थी कि वह इस संघर्ष को और आगे बढ़ा सके। अगर ऑपरेशन कुछ और दिन चलता, तो पाकिस्तान की एयर पावर और रक्षा ढांचा और कमजोर हो सकता था।
Pakistan के अंदर क्या बहस चल रही है?
अब जब आसिम मुनीर सार्वजनिक मंच से कह रहे हैं कि India के साथ संघर्ष के दौरान Allah की मदद से Pakistan बच गया, तो पाकिस्तान के भीतर इस बयान पर अलग-अलग रिएक्शन आ रहे हैं।
- एक तबका कह रहा है कि मुनीर धार्मिक भावनाओं के सहारे सेना और जनता को दिलासा देने की कोशिश कर रहे हैं।
- दूसरा तबका मानता है कि यह बयान इस बात का इशारा है कि operation sindoor में Pakistan को असल में बड़ा सैन्य झटका लगा।
सोशल मीडिया पर लोग पुराने न्यूज़ रिपोर्ट्स, एनालिसिस और सैटेलाइट इमेजेज शेयर कर रहे हैं, जिनमें कथित तौर पर 11 एयरबेस और दूसरे ठिकानों पर हुए नुकसान की चर्चा है। कई यूजर्स यह सवाल भी उठा रहे हैं कि अगर सब कुछ कंट्रोल में था, तो फिर Pakistan के DGMO को युद्धविराम की गुजारिश क्यों करनी पड़ी।
भारत का स्टैंड क्या था?
India की तरफ से साफ कहा गया था कि operation sindoor किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ एक टारगेटेड स्ट्राइक है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह संदेश दिया कि पहलगाम जैसे हमले अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और आतंक को सपोर्ट देने वाली जमीन सुरक्षित नहीं रहेगी।
भारतीय मीडिया और कई अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषकों ने दावा किया कि पाकिस्तान के 11 एयरबेस और कई एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय कर देना Pakistan के लिए बड़ा स्ट्रैटेजिक लॉस था। Pakistan ने आधिकारिक तौर पर इतने बड़े नुकसान को स्वीकार नहीं किया, लेकिन अब मुनीर के बयान के बाद इस पर फिर से चर्चा तेज हो गई है।
International मैसेज और असर
operation sindoor ने दुनिया को दो बड़े संकेत दिए।
- पहला, भारत अब बड़े आतंकी हमलों के बाद केवल डिप्लोमैटिक स्टेटमेंट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत होने पर सटीक सैन्य कार्रवाई करेगा।
- दूसरा, अगर किसी देश की जमीन से आतंकवाद ऑपरेट हो रहा है, तो वह जगह खुद भी सुरक्षित नहीं रहेगी।
कई अंतरराष्ट्रीय ऑब्जर्वर मानते हैं कि Pakistan के Army Chief का यह बयान, जिसमें वे Allah की मदद का जिक्र करते हैं, दरअसल India की सैन्य क्षमता और operation sindoor की इंपैक्ट की अप्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति जैसा है। साथ ही, यह पाकिस्तान के अंदरूनी राजनीतिक–आर्थिक दबाव और सेना की इमेज मैनेजमेंट की कोशिशों को भी दिखाता है।















