मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के डोंगरगांव में एक अजीब विवाद सामने आया है। यहां एक खेत मालिक ने गांव की सार्वजनिक बावड़ी को बंद करने की कोशिश की, जिसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने हंगामा मचा दिया। इस baori band karne par tanav के चलते पूरे गांव में तनाव का माहौल बन गया और मामला पुलिस तक जा पहुंचा।
क्या है पूरा मामला?
डोंगरगांव में दशकों से चली आ रही एक सार्वजनिक बावड़ी को लेकर यह विवाद खड़ा हुआ है। गांव के खेत मालिक दगडू सेठ उर्फ चौकसे का कहना था कि अब नल जल योजना के तहत हर घर में पानी पहुंच रहा है, इसलिए पुरानी बावड़ी की जरूरत नहीं रही। लेकिन ग्रामीणों की सोच इससे बिल्कुल अलग थी।
मंगलवार की सुबह जब खेत मालिक ने JCB मशीन लेकर बावड़ी में मिट्टी डालनी शुरू की, तो गांववाले भड़क गए। उनका कहना था कि वे 50 सालों से इसी बावड़ी का पानी पी रहे हैं और इसे बंद नहीं होने देंगे। गुस्से में आकर ग्रामीणों ने पत्थरबाजी कर दी, जिससे JCB और खेत मालिक की एक कार को काफी नुकसान पहुंचा। कार को तो गांव वालों ने हाईवे की नाली में धकेल दिया।
यूरिया डालने का गंभीर आरोप
गांव की महिलाओं ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। बसंती भाई और रेखा भाई सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि करीब आठ दिन पहले खेत मालिक ने बावड़ी के पानी में यूरिया और कीटनाशक दवाई मिला दी थी। इसके बाद पानी खराब हो गया और पीने लायक नहीं रहा। ग्रामीणों को शक है कि यह सब इसलिए किया गया ताकि लोग बावड़ी का इस्तेमाल छोड़ दें और उसे बंद किया जा सके।
गांव की बसंती भाई ने भावुक होकर कहा, “हम 50 साल से ज्यादा समय से इसी कुएं का पानी पीते आ रहे हैं। अचानक यूरिया डाल देना बहुत गलत बात है। सुनने में तो यह भी आ रहा है कि कीटनाशक भी डाला गया है। यह हमारे साथ अन्याय है।”
समझौते की कोशिश लेकिन…
जब मामला बिगड़ता देख खेत मालिक के भाई राजेंद्र चौकसे गांव में शांति बहाल करने पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को अपने खर्चे से ट्यूबवेल करवाकर देने की पेशकश की। राजेंद्र ने समझाया कि नल जल योजना से पानी बेहतर तरीके से आ रहा है और 30 फीट की पुरानी बावड़ी से सभी की जरूरत पूरी नहीं हो पाएगी।
लेकिन गांव वालों ने साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उन्हें उसी बावड़ी का पानी चाहिए जो सदियों से उनके पूर्वज पीते आए हैं। यह सिर्फ पानी का सवाल नहीं, बल्कि उनकी परंपरा और हक का मामला है।
पुलिस ने क्या कहा?
शाहपुर थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा ने बताया कि यह बावड़ी पहले से ही सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल होती आ रही थी। नल जल योजना शुरू होने के बाद पानी की व्यवस्था तो हो गई थी, लेकिन कुछ समय पहले पोल गिर गया था। उसे दोबारा लगाने की तैयारी चल रही थी और दोनों पक्षों में सहमति भी बन गई थी।
“आज सुबह 11 बजे पोल लगाना था, लेकिन खेत मालिक ने अचानक JCB से बावड़ी को मिट्टी से भरना शुरू कर दिया। इससे विवाद हो गया। ग्रामीणों ने JCB तोड़ दी और कार को नाली में धकेल दिया। हमने दोनों पक्षों को बुलाकर समझाया है,” थाना प्रभारी ने कहा।
पुलिस ने यूरिया मिलाने के आरोप को गंभीरता से लिया है। बावड़ी के पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों की मांग
गांव वाले अब पंचायत के माध्यम से खेत मालिक के खिलाफ FIR दर्ज कराने की तैयारी में हैं। रेखा भाई ने कहा, “बरसों से इसी कुएं से पानी पीते आ रहे हैं। अगर यह बंद हो गया तो हमारे पीने के पानी की समस्या हो जाएगी। हम इसे बंद नहीं होने देंगे।”
ग्रामीणों का तर्क है कि नल जल योजना में कई बार पानी नहीं आता और गर्मियों में समस्या और बढ़ जाती है। ऐसे में बावड़ी उनका भरोसेमंद स्रोत है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में कर लिया है और गांव में शांति बहाल है। पानी के सैंपल की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। अगर यूरिया या कीटनाशक मिलाने की बात सही साबित होती है तो खेत मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।
यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि आधुनिक सुविधाओं के बावजूद ग्रामीण इलाकों में परंपरागत जल स्रोतों की अहमियत आज भी कम नहीं हुई है। साथ ही यह सवाल भी उठता है कि सार्वजनिक संपत्ति को निजी तौर पर बंद करने का किसी को कोई अधिकार है या नहीं।
बुरहानपुर के इस छोटे से गांव की यह घटना पूरे प्रदेश में जल संसाधनों के प्रबंधन और ग्रामीण अधिकारों पर बहस छेड़ सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कैसे सुलझाता है और ग्रामीणों के पारंपरिक जल अधिकारों की रक्षा कैसे होती है।















