झारखंड: भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम में एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। झारखंड के चाईबासा में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने शुक्रवार को भवन प्रमंडल विभाग के कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) अरुण कुमार सिंह को 70 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी एक सुनियोजित जाल के तहत की गई, जिसमें आरोपी अभियंता बिल पास कराने के बदले में मोटी रकम की मांग कर रहा था।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एक ठेकेदार ने भवन प्रमंडल विभाग के तहत करीब 55 लाख रुपये की लागत से एक भवन का निर्माण कार्य पूरा किया था। जब ठेकेदार ने अपना बिल पास कराने के लिए कार्यपालक अभियंता अरुण कुमार सिंह से संपर्क किया, तो उन्होंने बिल पास करने के एवज में ढाई प्रतिशत (2.5%) की रकम घूस के रूप में मांगी।
55 लाख के हिसाब से ढाई प्रतिशत की रकम करीब 1.37 लाख रुपए बनती है। हालांकि, पहली किस्त के तौर पर आरोपी अभियंता ने 70 हजार रुपए की डिमांड की थी। परेशान होकर ठेकेदार ने इस मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो में दर्ज कराई।
ACB ने ऐसे बिछाया जाल
शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने तुरंत एक्शन मोड में आकर पूरे मामले की जांच-पड़ताल शुरू की। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर ACB ने एक सुनियोजित ट्रैप (trap) बिछाया। ठेकेदार को निर्देश दिया गया कि वह तय समय पर कार्यपालक अभियंता के पास पैसे लेकर पहुंचे।
शुक्रवार को जब ठेकेदार 70 हजार रुपए लेकर अरुण कुमार सिंह के पास पहुंचा और उन्होंने रिश्वत की रकम अपने हाथों में ली, तभी मौके पर छिपी ACB की टीम ने दबिश देकर उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। इस दौरान पूरी कार्रवाई का वीडियो और फोटोग्राफी भी की गई।
Executive Engineer Arrested Bribery के मामले में क्या होगी कार्रवाई?
गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने कार्यपालक अभियंता अरुण कुमार सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज किया है। उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
एसीबी अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और यह देखा जा रहा है कि क्या आरोपी अभियंता ने इससे पहले भी ऐसी वसूली की है। अगर जांच में और भी शिकायतें सामने आती हैं, तो मामला और गंभीर हो सकता है।
सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की समस्या
यह मामला एक बार फिर सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार की समस्या को उजागर करता है। छोटे-बड़े ठेकेदार और आम लोगों को अपना वाजिब काम कराने के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती है। बिल पास कराने, फाइलें आगे बढ़ाने और विभिन्न प्रकार की मंजूरी लेने के लिए अफसरों की जेब गर्म करना एक आम बात बन गई है।
हालांकि, एंटी करप्शन ब्यूरो की सक्रियता से ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम लगाने का काम लगातार जारी है। पिछले कुछ समय में झारखंड में ACB ने कई बड़े अफसरों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है।
लोगों की प्रतिक्रिया
इस गिरफ्तारी की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों और ठेकेदार समुदाय में राहत की लहर दौड़ गई है। कई ठेकेदारों ने बताया कि बिल पास कराने के लिए कमीशन देना एक आम प्रथा बन गई थी। अब जबकि ACB सक्रिय हो गई है, तो उम्मीद है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
एक स्थानीय ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “बिना कमीशन दिए फाइल आगे ही नहीं बढ़ती थी। अच्छा हुआ कि ACB ने कार्रवाई की, अब दूसरे अफसर भी डरेंगे।”
भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत संदेश
चाईबासा में Executive Engineer Arrested Bribery का यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई है। 70 हजार रुपए घूस लेते पकड़े गए कार्यपालक अभियंता अरुण कुमार सिंह का मामला यह साबित करता है कि कानून सबके लिए एक समान है। ACB की यह कार्रवाई अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है कि अब रिश्वत लेना आसान नहीं है।
जनता की उम्मीद है कि ऐसी कार्रवाइयां जारी रहें और सरकारी विभागों में पारदर्शिता आए, ताकि आम लोगों और ठेकेदारों को अपना वाजिब काम कराने के लिए घूस न देनी पड़े।
















