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Jhabua Bribery Case: लोकायुक्त ने लेखापाल को 14,500 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

Jhabua bribery case में लोकायुक्त इंदौर ने जनजातीय कार्य विभाग के लेखापाल जामसिंह अमलियार को 14,500 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। पूरी खबर पढ़ें।

Updated at: Fri, 12 Dec 2025, 12:10 PM (IST)
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मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में एक बड़ा Jhabua bribery case सामने आया है। लोकायुक्त इंदौर की टीम ने बुधवार को जनजातीय कार्य विभाग के एक लेखापाल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी लेखापाल ने एक सरकारी शिक्षक से शिकायत निपटाने के बदले में मोटी रकम की मांग की थी।

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क्या है पूरा मामला?

शांतिलाल वसुनिया, जो शासकीय माध्यमिक विद्यालय अम्बापाडा, पेटलावद में माध्यमिक शिक्षक के पद पर तैनात हैं, के खिलाफ हाल ही में एक शिकायत दर्ज की गई थी। सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग झाबुआ ने 29 अक्टूबर 2025 को शांतिलाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

शिकायत में आरोप था कि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में भाई-भतीजावाद किया गया और योग्य उम्मीदवारों की जगह अयोग्य लोगों को पदस्थापित किया गया। शांतिलाल ने 30 अक्टूबर को अपना जवाब जमा कर दिया था।

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50 हजार की डिमांड, 14,500 में सेटल

इसके बाद जनजातीय कार्य विभाग में लेखापाल के पद पर कार्यरत जामसिंह अमलियार ने शिक्षक से संपर्क किया। उन्होंने शांतिलाल से कहा कि अगर वे उनकी शिकायत खत्म करवाना चाहते हैं तो उन्हें 50,000 रुपये देने होंगे।

परेशान शिक्षक ने यह बात लोकायुक्त इंदौर के पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय को बताई। जब इस शिकायत की जांच की गई तो मामला सही पाया गया। इसके बाद 11 दिसंबर 2025 को लोकायुक्त की टीम ने ट्रैप की योजना बनाई।

ऐसे हुई रंगे हाथों गिरफ्तारी

लोकायुक्त की टीम ने पूरी तैयारी के साथ ट्रैप बिछाया। शिक्षक और आरोपी लेखापाल के बीच बातचीत के बाद रकम 14,500 रुपये पर तय हुई। जब जामसिंह अमलियार ने शांतिलाल से यह रिश्वत की रकम ली, उसी समय लोकायुक्त की टीम ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया।

56 वर्षीय जामसिंह अमलियार माधवपुरा गांव के रहने वाले हैं और जिला पुलिस लाइन के पीछे रहते हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

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सात सदस्यीय ट्रैप टीम ने की कार्रवाई

इस Jhabua bribery case में लोकायुक्त की एक खास टीम ने काम किया। इस टीम में कार्यवाहक निरीक्षक सचिन पटेरिया, कार्यवाहक निरीक्षक रेनू अग्रवाल, कार्यवाहक पीआर विवेक मिश्रा, आरक्षक विजय कुमार, आरक्षक मनीष माथुर, आरक्षक पवन पटोरिया और आरक्षक आशीष नायडू शामिल थे।

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शिक्षा विभाग में बढ़ता भ्रष्टाचार

यह मामला एक बार फिर सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करता है। खासकर शिक्षा और जनजातीय कल्याण जैसे संवेदनशील विभागों में ऐसी घटनाएं चिंताजनक हैं।

शिक्षकों की नियुक्ति और तबादले में पारदर्शिता की कमी अक्सर विवादों का कारण बनती है। इस Jhabua bribery case में भी एक ईमानदार शिक्षक को सिर्फ इसलिए परेशान किया जा रहा था क्योंकि उन्होंने अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई थी।

आगे की कार्रवाई

फिलहाल आरोपी लेखापाल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। लोकायुक्त की टीम मामले की और गहराई से जांच कर रही है कि क्या इस भ्रष्टाचार के जाल में और भी लोग शामिल हैं।

यह घटना यह साबित करती है कि अगर लोग हिम्मत से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएं और सही अधिकारियों को सूचित करें, तो भ्रष्ट अधिकारियों को सजा जरूर मिलती है।

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Ravi Sen

रवि सेन महाकाल की नगरी उज्जैन के निवासी हैं। उन्होंने ग्रेजुएशन के बाद पत्रकारिता में कदम रखा और दैनिक लोकस्वामी के उज्जैन एडिशन के स्थानीय संपादक के रूप में 12 साल तक अपनी सेवाएं दी। इसके बाद, रवि सेन नेशनल न्यूज़ चैनल TV9 भारतवर्ष के उज्जैन ब्यूरो के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा, वे अपना खुद का साप्ताहिक अखबार हेडलाइन टुडे भी उज्जैन से प्रकाशित करते हैं और Fact Finding न्यू एज डिजिटल मीडिया से भी जुड़े हैं। रवि सेन को क्राइम, राजनीति और ग्राउंड रिपोर्टिंग में गहरी पकड़ के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपने करियर में कई विशेष रिपोर्ट्स की हैं, जिन्होंने समाज को नई दिशा देने में मदद की है।

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