मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बुरी खबर आ सकती है। अगले वित्तीय वर्ष यानी 2026-27 से प्रदेश में बिजली के बिल में जोरदार इजाफा हो सकता है। दरअसल, MP Electricity Tariff को लेकर मध्य प्रदेश पावर जेनरेशन कंपनी ने राज्य विद्युत नियामक आयोग में याचिका दाखिल की है, जिसमें करीब 10 फीसदी बढ़ोतरी की मांग की गई है।
42,000 करोड़ रुपये के घाटे का दावा
पावर जेनरेशन कंपनी ने अपनी टैरिफ याचिका में बताया है कि कंपनी को लगभग 42,000 करोड़ रुपये का भारी घाटा हो रहा है। कंपनी का तर्क है कि इस घाटे की भरपाई के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी करना जरूरी हो गया है। अगर यह प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है तो 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।
मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) के सामने यह याचिका पेश की गई है और 9 दिसंबर को प्रारंभिक सुनवाई भी पूरी हो चुकी है। अब जल्द ही आयोग जनसुनवाई की तारीख तय करेगा, जिसमें आम उपभोक्ता अपनी आपत्तियां और सुझाव दे सकेंगे।
सोलर एनर्जी बढ़ रही, फिर भी क्यों बढ़ रहे दाम?
MP Electricity Tariff के प्रस्ताव के खिलाफ प्रदेश में विरोध की आवाजें तेज होने लगी हैं। विरोध करने वालों का मुख्य सवाल यह है कि जब मध्य प्रदेश सरकार लगातार सोलर एनर्जी को बढ़ावा दे रही है और कई सरकारी इमारतों पर सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं, तो बिजली उत्पादन की लागत तो घटनी चाहिए थी, न कि बढ़नी चाहिए।
सौर ऊर्जा पारंपरिक बिजली उत्पादन के मुकाबले काफी सस्ती मानी जाती है। जब सोलर पावर का उत्पादन बढ़ रहा है तो फिर टैरिफ बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ रही है? यह सवाल आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ बिजली विशेषज्ञों को भी परेशान कर रहा है।
कोयले पर GST कटौती के बाद भी क्यों बढ़ रहे दाम?
एक और अहम बात यह है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने कोयले पर GST में कटौती की है। इससे कोयले की कीमतें कम हुई हैं और थर्मल पावर प्लांट में बिजली उत्पादन की लागत में कमी आई है। ऐसे में MP Electricity Tariff Hike की मांग को लोग पूरी तरह अनुचित और अतार्किक बता रहे हैं।
बिजली विशेषज्ञों का कहना है कि जब उत्पादन लागत घट रही है तो दरें बढ़ाने का तर्क समझ से परे है। प्रदेश में सरकार और बिजली कंपनियां तो सरप्लस बिजली उत्पादन का दावा करती हैं, फिर भी हर साल दरें बढ़ाने की मांग की जाती है।
पड़ोसी राज्यों से तुलना में पिछड़ रहा MP
दिलचस्प बात यह है कि पड़ोसी राज्यों में पिछले कई सालों से बिजली दरों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि मध्य प्रदेश में लगभग हर साल टैरिफ बढ़ाने की कवायद होती रहती है। इस वजह से प्रदेश के उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरे राज्यों से अतिरिक्त बिजली खरीदने से कंपनियों के खर्च बढ़ रहे हैं। यह अनियोजित खरीदी और प्रबंधन की अक्षमता का नतीजा है, जिसकी कीमत आम उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ रही है।
एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने उठाए सवाल
बिजली विभाग के जानकार एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने भी इस MP Electricity Tariff Hike के प्रस्ताव को पूरी तरह गलत और अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों और पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए टैरिफ याचिका दायर की है।
अग्रवाल के मुताबिक, Parliamentary Committee ने 10 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी की बात कही है, जो उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ाने वाली साबित होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सौर ऊर्जा का उत्पादन बढ़ रहा है और कोयले पर GST कम हुआ है, तो दरें बढ़ाने की क्या जरूरत है?
कंपनियों की अक्षमता की कीमत क्यों चुकाएं उपभोक्ता?
एडवोकेट अग्रवाल का साफ कहना है कि बिजली कंपनियों की अक्षमता और अनियोजित ढंग से बिजली खरीदने के कारण घाटा बढ़ रहा है। इस घाटे की भरपाई के लिए आम जनता से दरें बढ़ाकर पैसे वसूलने का प्रयास किया जा रहा है, जो बिल्कुल अनुचित है।
उन्होंने प्रदेश के सभी बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि जैसे ही विद्युत नियामक आयोग द्वारा जनसुनवाई की सूचना जारी हो, सभी लोग बड़ी संख्या में अपनी आपत्तियां दर्ज कराएं, ताकि इस अनुचित बढ़ोतरी को रोका जा सके।
क्या करें उपभोक्ता?
अगर आप भी मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ता हैं और इस MP Electricity Tariff Hike से परेशान हैं, तो आप भी आयोग के सामने अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। जनसुनवाई में भाग लेकर आप अपने सवाल और विरोध दर्ज करा सकते हैं।
यह तय है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्म होगा। उपभोक्ता संगठन और विशेषज्ञ इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। देखना होगा कि विद्युत नियामक आयोग इस मामले में क्या फैसला करता है और क्या वाकई 1 अप्रैल 2026 से बिजली के बिल महंगे हो जाएंगे या नहीं।















