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BJP जिलाध्यक्ष चुप क्यों? FIR के बाद बवाल, सड़कों पर उतरे सैकड़ों ग्रामीण और कार्यकर्ता, कलेक्ट्रेट घेराव

बुरहानपुर में बवाल! दलित महिला सरपंच के समर्थन में सैकड़ों ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे। BJP जिलाध्यक्ष की FIR निरस्त करने की मांग। जिलाध्यक्ष चुप क्यों?

Updated at: Thu, 11 Dec 2025, 11:35 PM (IST)
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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर BJP जिलाध्यक्ष विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। जो मामला कुछ दिन पहले सिर्फ FIR तक सीमित था, वह अब आंदोलन का रूप ले चुका है। जैनाबाद गांव की दलित महिला सरपंच जया इंगले के समर्थन में सैकड़ों ग्रामीण बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचे और BJP जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस प्रदर्शन में भाजपा के कई कार्यकर्ता भी अपने ही जिलाध्यक्ष के खिलाफ नजर आए। “जिलाध्यक्ष तेरी तानाशाही नहीं चलेगी” और “FIR निरस्त करो” के नारों से कलेक्ट्रेट परिसर गूंज उठा। लेकिन सवाल यह है कि आखिर मामला इतना बड़ा कैसे हो गया?

क्या है पूरा मामला? सच क्या है?

यह घटना 9 दिसंबर की है। बुरहानपुर जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर दूर शिकारपुरा थाना क्षेत्र के जैनाबाद गांव में यह विवाद शुरू हुआ। गांव में 3 दिन पहले नया सीसी रोड बनाया गया था, जो अभी पूरी तरह सूखा नहीं था।

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ग्रामीणों के मुताबिक, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने के ड्राइवर राहुल पाटिल ने रेत से भरा ट्रैक्टर उसी गीली सड़क पर चढ़ा दिया। सरपंच प्रतिनिधि महेंद्र इंगले ने जब इसका विरोध किया तो बात बढ़ गई। मामूली कहासुनी धीरे-धीरे गंभीर विवाद में तब्दील हो गई।

इसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने की पत्नी ने शिकारपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दलित महिला सरपंच जया इंगले, उनके पति महेंद्र इंगले, देवर राजू इंगले सहित कुल 15 लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 191(2), 296(अ), 115(2) और 351(3) के तहत मामला दर्ज कर लिया।

कलेक्ट्रेट में उमड़ा जनसैलाब

9 दिसंबर को जब यह FIR दर्ज हुई, तो जैनाबाद गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने इसे एकतरफा और अन्यायपूर्ण कार्रवाई बताया। बुधवार को सरपंच जया इंगले के समर्थन में सैकड़ों ग्रामीण कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल थे।

प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और FIR निरस्त करने की मांग की। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस प्रदर्शन में भाजपा के कुछ कार्यकर्ता भी अपने ही जिलाध्यक्ष के खिलाफ नजर आए। यह भाजपा के लिए एक शर्मनाक स्थिति है कि उनके अपने कार्यकर्ता ही जिलाध्यक्ष के खिलाफ सड़कों पर उतर आए।

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“जिलाध्यक्ष तेरी तानाशाही नहीं चलेगी”

कलेक्ट्रेट परिसर में जमकर नारेबाजी हुई। प्रदर्शनकारियों ने “FIR निरस्त करो, निरस्त करो” और “जिलाध्यक्ष तेरी तानाशाही नहीं चलेगी, नहीं चलेगी” के नारे लगाए। महिलाओं ने खासतौर पर आक्रोश जताया और कहा कि पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की है।

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एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा, “हमारी सरपंच जी ने गांव के विकास के लिए सड़क बनवाई। उन्होंने अपना फर्ज निभाया। लेकिन जिलाध्यक्ष के ड्राइवर ने गीली सड़क पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया। जब विरोध किया तो उल्टा हमारे लोगों पर केस कर दिया। यह कहां का इंसाफ है?”

ग्रामीणों का पक्ष: “गलती किसकी?”

ग्रामीणों ने विस्तार से पूरी घटना बताई। उनके मुताबिक, जैनाबाद गांव में सिर्फ 3 दिन पहले सीसी रोड का निर्माण हुआ था। रोड अभी पूरी तरह सूखा नहीं था और गीला था। लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष के ड्राइवर राहुल पाटिल ने दबंगई दिखाते हुए नवनिर्मित रोड से रेत से भरा ट्रैक्टर निकालने की कोशिश की।

ग्रामीणों ने कहा, “गांव का मामला था, बैठकर बात हो सकती थी। लेकिन जिलाध्यक्ष को अपने पद का गुमान हो गया है। उन्होंने दुर्भावना से प्रेरित होकर हमारी दलित महिला सरपंच के खिलाफ FIR करवा दी।”

एक ग्रामीण ने बताया, “जिलाध्यक्ष का मकान गांव में बन रहा है। उसके लिए रेत ले जाना था। लेकिन सरपंच ने कहा कि सड़क अभी गीली है, थोड़ा इंतजार करें। इस पर उनके ड्राइवर ने बदतमीजी की। जब सरपंच के पति ने विरोध किया तो मारपीट हो गई।”

भाजपा कार्यकर्ता भी जिलाध्यक्ष के खिलाफ

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि प्रदर्शन में भाजपा के कुछ कार्यकर्ता भी जिलाध्यक्ष के खिलाफ नजर आए। भाजपा नेता गोकुल प्रजापति ने खुलकर जिलाध्यक्ष की आलोचना की।

गोकुल प्रजापति ने कहा, “गांव का मामला था, बैठकर बात हो सकती थी। लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष को अपने पद का गुमान हो गया है। जिसके चलते दुर्भावना से उन्होंने FIR दर्ज करवाई है। हमारा पुलिस और जिला प्रशासन से अनुरोध है कि FIR को निरस्त किया जाए। मैंने आज तक गांव में ऐसी राजनीति नहीं देखी। हम सब जिलाध्यक्ष के विरोध में आए हैं।”

यह बयान बुरहानपुर BJP जिलाध्यक्ष विवाद में एक बड़ा मोड़ है। जब खुद पार्टी के कार्यकर्ता ही जिलाध्यक्ष के खिलाफ खड़े हो जाएं, तो यह पार्टी के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

जातिसूचक शब्दों का आरोप

सरपंच जया इंगले की भतीजी याशिका इंगले ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उल्टा जिलाध्यक्ष के परिवार ने ही जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया है।

याशिका ने कहा, “यह मामला सरासर गलत तरीके से दर्ज हुआ है। पुलिस आए दिन हमें परेशान कर रही है। हमारी सरपंच जी दलित समाज से हैं। उन्हें जातिसूचक शब्द कहे गए, उन्हें अपमानित किया गया। सड़क निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न की गई। अब जिलाध्यक्ष सहित उनकी पत्नी और बेटी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए। FIR को तुरंत निरस्त किया जाए।”

यह आरोप मामले को और गंभीर बना देता है। अगर यह सच है कि दलित महिला सरपंच को जातिसूचक शब्द कहे गए, तो यह न सिर्फ कानूनी अपराध है बल्कि सामाजिक रूप से भी निंदनीय है।

पुलिस क्या कह रही है?

शिकारपुरा थाना प्रभारी विक्रम सिंह चौहान ने बताया, “मामला 9 दिसंबर का है। जैनाबाद गांव में सीसी रोड पर ट्रैक्टर चढ़ाने को लेकर विवाद हो गया। भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने की पत्नी ने शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि ट्रैक्टर को लेकर विवाद हुआ था। ड्राइवर को धमकाया जा रहा था और मारने की कोशिश भी की जा रही थी। जब वे खुद पहुंचीं तो उनके साथ भी गालीगलौज की गई और जान से मारने की धमकी दी गई।”

थाना प्रभारी ने आगे कहा, “इस मामले में सरपंच जया इंगले, सरपंच प्रतिनिधि महेंद्र इंगले, देवर राजू इंगले सहित 15 लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 191(2), 296(अ), 115(2) और 351(3) के तहत मामला दर्ज किया गया है। गांव में पुलिस जवान तैनात किए गए हैं। मामले की जांच जारी है।”

BJP जिलाध्यक्ष की चुप्पी

सबसे अहम सवाल यह है कि भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने इस पूरे मामले पर क्यों चुप हैं? जब उनसे दूरभाष पर संपर्क किया गया और उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया।

डॉ. मनोज माने ने कहा, “मुझे इस मामले में कुछ नहीं कहना।”

यह जवाब काफी नहीं है। जब सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आएं, जब आपके अपने पार्टी कार्यकर्ता आपके खिलाफ नारे लगाएं, तो सिर्फ “कुछ नहीं कहना” कहकर मामला खत्म नहीं होता।

आगे क्या होगा?

बुरहानपुर BJP जिलाध्यक्ष विवाद अब एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे का रूप ले चुका है। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक FIR निरस्त नहीं होती, वे आंदोलन जारी रखेंगे।

दूसरी तरफ, दलित महिला सरपंच के साथ कथित अन्याय का मुद्दा भी उठ रहा है। अगर जातिसूचक शब्दों के आरोप सही हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला है।

भाजपा के लिए यह एक कठिन परीक्षा है। पार्टी को फैसला करना होगा कि वह अपने जिलाध्यक्ष के साथ खड़ी होगी या दलित महिला सरपंच के साथ। राजनीतिक समीकरण जो भी हो, सच्चाई सामने आनी चाहिए।

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