मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में एक बार फिर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जमीन के नामांतरण के लिए पटवारी ने किसान से मोटी रकम की रिश्वत मांगी थी। लोकायुक्त इंदौर की टीम ने पटवारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह patwari bribery case खरगोन जिले में भ्रष्टाचार की गंभीर समस्या को उजागर करता है।
कैसे हुई रिश्वत की मांग
महेश्वर तहसील के ग्राम खारिया निवासी 32 वर्षीय बच्चू चौहान ने अपनी पत्नी रिंकू चौहान के नाम पर 1.50 लाख रुपये में खसरा नंबर 7/1/2 की कृषि भूमि खरीदी थी। इसी तरह बच्चू के भाई किशोर चौहान ने भी अपनी पत्नी अनिता चौहान के नाम से इतनी ही रकम में जमीन का सौदा 29 सितंबर 2025 को किया था।
जब दोनों भाइयों ने जमीन के नामांतरण के लिए रजिस्ट्री की कॉपी मंडलेश्वर तहसील के हल्का नंबर 24-25 के पटवारी छतरसिंह चौहान को दी, तो उन्होंने मोटी रकम की डिमांड कर दी। पटवारी ने नामांतरण के एवज में 1 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। जब आवेदक ने राशि कम करने की गुजारिश की, तो पटवारी 50 हजार रुपये पर राजी हो गया।
लोकायुक्त में शिकायत दर्ज
परेशान होकर बच्चू चौहान ने लोकायुक्त इंदौर के पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के पास शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के सत्यापन में जब मामला सही पाया गया, तो लोकायुक्त ने तुरंत कार्रवाई करने का फैसला किया।
ट्रैप में फंसा भ्रष्ट पटवारी
5 दिसंबर 2025 को लोकायुक्त टीम ने विशेष ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई। टीम ने तय किया कि पहली किस्त के तौर पर 25 हजार रुपये आरोपी पटवारी को दिए जाएंगे। जैसे ही छतरसिंह चौहान ने रिश्वत की रकम हाथ में ली, लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
इस patwari bribery case में आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। कानूनी कार्रवाई जारी है।
ट्रैप ऑपरेशन में शामिल टीम
इस सफल ऑपरेशन में लोकायुक्त की एक मजबूत टीम शामिल थी। टीम में कार्यवाहक उप पुलिस अधीक्षक आनंद चौहान, कार्यवाहक प्रशासनिक अधिकारी रणजीत द्विवेदी, आरक्षक विजय कुमार, सतीश यादव, पवन पटोरिया, आशीष नायडू और चंद्रमोहन बिष्ट शामिल थे।
आरोपी पटवारी की जानकारी
55 वर्षीय छतरसिंह चौहान पिता स्वर्गीय मंगत सिंह चौहान मंडलेश्वर तहसील के हल्का नंबर 24-25 में पटवारी के पद पर तैनात थे। वह फिलहाल श्रीनिवास कॉलोनी मरदानिया, ग्राम जलूद पंचायत खरगोन में रहते हैं। मूल रूप से वह ग्राम सीनखेड़ा, तहसील एवं जिला खरगोन के निवासी हैं।
भ्रष्टाचार पर लगाम की जरूरत
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। आम किसानों को अपनी ही जमीन के नामांतरण के लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। लोकायुक्त की सक्रियता से भले ही कुछ मामलों में कार्रवाई हो रही है, लेकिन इस समस्या पर व्यापक स्तर पर अंकुश लगाने की जरूरत है।
खरगोन जिले में यह पहली बार नहीं है जब किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ रिश्वत का मामला सामने आया हो। ऐसे मामलों से आम जनता का सरकारी तंत्र से विश्वास कम होता है।
आखिरी बात
इस patwari bribery case में लोकायुक्त की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है। हालांकि, जब तक ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उदाहरण पेश नहीं किए जाएंगे, तब तक यह समस्या जारी रहेगी। किसानों और आम जनता को भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और लोकायुक्त जैसी संस्थाओं की मदद लेनी चाहिए।
















