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MP Education Reform: CM यादव का बड़ा फैसला | जानिए कैसे बदलेगी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने MP education reform पर जोर दिया। ड्रॉपआउट रेट में कमी, व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास को मिलेगी प्राथमिकता। जानें पूरी खबर।

Edited By: Sameer Mahajan
Updated at: Fri, 05 Dec 2025, 11:43 PM (IST)
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भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े बदलाव की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने साफ संकेत दिए हैं कि अब सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और कृषि शिक्षा को भी प्राथमिकता दी जाएगी। मंगलवार को विधानसभा समिति कक्ष में स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने MP education reform को लेकर कई अहम निर्देश दिए।

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ड्रॉपआउट रेट में आई जबरदस्त कमी

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार सुधार हो रहा है। पिछले दो सालों में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में भारी गिरावट आई है। ड्रॉपआउट रेट जो पहले 21.4 फीसदी था, वो अब घटकर सिर्फ 16.8 फीसदी रह गया है। यह MP education reform की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। डॉ यादव ने कहा कि इसे और कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और प्रोत्साहन योजनाओं का फायदा ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक पहुंचाया जाए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का सफल क्रियान्वयन

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत पिछले दो सालों में हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की परीक्षाएं समय पर कराई गईं और नतीजे भी तय वक्त में घोषित किए गए। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि नई शिक्षा नीति में व्यावसायिक शिक्षा पर खास ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि बच्चों को सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि रोजगार के लायक हुनर भी सिखाना जरूरी है।

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अच्छे प्रदर्शन वाले स्कूलों को मिलेगा प्रोत्साहन

MP education reform के तहत एक और अहम फैसला यह लिया गया कि जिन स्कूलों के परीक्षा परिणाम अच्छे रहे हैं, उनके प्रिंसिपलों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। यह कदम शिक्षकों को बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करेगा।

एक भवन, कई उपयोग की नई सोच

मुख्यमंत्री ने एक दिलचस्प सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि “भवन एक, कक्षाएं अनेक” की तर्ज पर स्कूल की इमारतों का इस्तेमाल खाली समय में कॉलेज की कक्षाओं के लिए भी किया जा सकता है। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और सरकारी खर्च में भी बचत होगी।

बालिकाओं के लिए खास योजनाएं

बैठक में बताया गया कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। करीब 19 लाख लड़कियों को सैनिटेशन और हाइजीन किट के लिए हर साल 300 रुपये डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए दिए जा रहे हैं। छात्रावासों में वाशिंग मशीन, रोटी मेकर और मैट्रेस जैसी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं।

प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाभियान योजना के तहत 210 नए छात्रावास मंजूर किए गए हैं। मुफ्त किताबें, स्कूटी और साइकिल वितरण योजनाएं भी पूरे जोर-शोर से चल रही हैं।

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परीक्षा परिणामों में शानदार सुधार

MP education reform का असर परीक्षा नतीजों में साफ दिख रहा है। साल 2024-25 की पहली परीक्षा में कक्षा 10वीं का रिजल्ट 74 फीसदी और 12वीं का 76 फीसदी से ज्यादा रहा। पहली और दूसरी परीक्षा में औसतन क्रमशः 87 और 82 फीसदी बच्चे पास हुए।

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सबसे खास बात यह रही कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में प्रथम श्रेणी लाने वालों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। यह दिखाता है कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।

सांदीपनि और पीएम श्री स्कूलों का विस्तार

सांदीपनि और पीएम श्री स्कूलों के जरिए बच्चों को आधुनिक शिक्षा मुहैया कराई जा रही है। इन स्कूलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने का काम भी चल रहा है।

व्यावसायिक और कृषि शिक्षा पर जोर

मुख्यमंत्री डॉ यादव का मानना है कि मध्य प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य में कृषि शिक्षा को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता देकर ही युवाओं को रोजगार के योग्य बनाया जा सकता है।

MP education reform की इस पहल से न सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर भी मिलेंगे। यह प्रदेश के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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