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Mid Day Meal Scam: बच्चों के खाने में 11 करोड़ की लूट! 5 साल तक चलता रहा खेल, अब 44 पर केस

mid day meal scam: बच्चों के खाने में 11 करोड़ की लूट का खुलासा! फर्जी छात्रों के नाम पर 5 साल तक चला खेल, 44 लोगों पर केस दर्ज, 100+ आरोपी पकड़े जा सकते हैं।

Edited By: Sameer Mahajan
Updated at: Fri, 28 Nov 2025, 10:41 PM (IST)
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उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में एक ऐसा घोटाला सामने आया है जो सुनकर आपका खून खौल जाएगा। बच्चों के खाने में 11 करोड़ की लूट का मामला उजागर हुआ है। बेसिक शिक्षा विभाग की मिड डे मील योजना में साल 2021 से 2025 के बीच यह mid day meal scam चलता रहा और किसी को पता तक नहीं चला। अब जाकर जिला समन्वयक समेत 44 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों की संख्या 100 से भी पार जा सकती है।

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कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?

यह mid day meal scam तब सामने आया जब कुछ स्कूलों ने शिकायत की कि उन्हें मिड डे मील के लिए कन्वर्जन कॉस्ट (खाना पकाने के लिए मिलने वाली राशि) कम मिल रही है। जब बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने PFMS पोर्टल पर इसकी जांच की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि कई मदरसों और परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की संख्या फर्जी तरीके से बढ़ाई गई थी और इस आधार पर बच्चों के खाने में 11 करोड़ की लूट की गई।

क्या है पूरा मामला?

मामले में मुख्य आरोपी जिला समन्वयक फिरोज अहमद खान है, जो 2008 से इस पद पर तैनात था। आरोप है कि उसने तीन मदरसों और चार परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की संख्या कागजों पर फर्जी तरीके से बढ़ाई। इन फर्जी छात्रों के नाम पर मिड डे मील का बजट जारी कराया गया और करीब 11 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि हड़प ली गई।

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BSA की जांच में यह भी पता चला कि कई मदरसों में तो छात्र थे ही नहीं, लेकिन कागजों पर उनकी उपस्थिति दिखाकर बजट निकाला गया। कन्वर्जन कॉस्ट और खाद्यान्न में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। यह mid day meal scam का एक ऐसा मामला है जो सिस्टम की खामियों को उजागर करता है।

44 लोगों पर केस दर्ज, गिरफ्तारी की तैयारी

अभी तक इस घोटाले में 44 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • जिला समन्वयक फिरोज अहमद खान
  • तीन मदरसों के प्रधानाध्यापक
  • पांच परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापक
  • पांच ग्राम प्रधान
  • अन्य संबंधित अधिकारी और कर्मचारी

बलरामपुर के SP विकास कुमार ने बताया कि जांच तेज है और जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारियां भी की जाएंगी। चूंकि मुख्य आरोपी 2008 से तैनात था, इसलिए आशंका है कि यह खेल कई और मदरसों और स्कूलों में भी चल रहा हो। बच्चों के खाने में 11 करोड़ की लूट का यह मामला और भी बड़ा हो सकता है।

प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

यह घोटाला प्रशासनिक लापरवाही की भी निशानी है। मिड डे मील जैसी योजना, जो सीधे तौर पर बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी है, उसमें इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होना चिंता की बात है। हर साल छात्र संख्या की जांच, बजट का ऑडिट और मोबाइल कॉलिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं होने के बावजूद पांच साल तक इस mid day meal scam का पता नहीं चल पाया।

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यह सवाल उठता है कि निगरानी तंत्र कहां फेल हुआ? क्या सिर्फ कागजी जांच से काम चल रहा था या फिर जमीनी स्तर पर कोई निरीक्षण ही नहीं हो रहा था? इस मामले से साफ है कि सिस्टम में बड़ी खामियां हैं जिनका फायदा भ्रष्ट तत्व उठा रहे हैं।

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बच्चों के भविष्य से खिलवाड़

मिड डे मील योजना गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए बनाई गई है ताकि उन्हें पोषण मिल सके और वे स्कूल आने के लिए प्रोत्साहित हों। लेकिन जब इस योजना के पैसे ही हड़प लिए जाएं तो यह सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।

कई बार ऐसे घोटालों में जो पैसा बच्चों के खाने के लिए था, वह लालची अधिकारियों की जेब में चला जाता है। नतीजा यह होता है कि बच्चों को या तो कम खाना मिलता है या फिर घटिया क्वालिटी का खाना परोसा जाता है। बच्चों के खाने में 11 करोड़ की लूट यह दिखाता है कि भ्रष्टाचार कितने निचले स्तर तक पहुंच चुका है।

आगे क्या होगा?

पुलिस ने बताया है कि जांच अभी शुरुआती दौर में है और मामला काफी बड़ा हो सकता है। चूंकि मुख्य आरोपी लंबे समय से इस पद पर था, इसलिए संभावना है कि और भी कई स्कूल और मदरसे इस जांच के दायरे में आ सकते हैं।

अभी तीन मदरसे और चार परिषदीय विद्यालय जांच के दायरे में हैं, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि यह संख्या बढ़ सकती है। PFMS पोर्टल पर और डेटा की जांच की जा रही है। 44 लोगों पर केस दर्ज होने के बाद अब और भी नाम सामने आ सकते हैं।

सख्त कार्रवाई की जरूरत

बलरामपुर का यह mid day meal scam एक बार फिर से यह दिखाता है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार कितना गहरा है। जो पैसा गरीब बच्चों के पेट के लिए था, वह भ्रष्ट अधिकारियों की जेब में चला गया। इस मामले में सख्त कार्रवाई की जरूरत है ताकि आगे ऐसी घटनाएं न हों।

साथ ही, निगरानी तंत्र को मजबूत करने की भी सख्त जरूरत है। सिर्फ कागजी जांच से काम नहीं चलेगा, जमीनी स्तर पर नियमित निरीक्षण होना चाहिए। तभी हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि सरकारी योजनाओं का फायदा उन लोगों तक पहुंचे जिनके लिए ये बनाई गई हैं।

अभी देखना यह है कि बच्चों के खाने में 11 करोड़ की लूट के इस मामले में और कितने लोग फंसते हैं और कितनी बड़ी कार्रवाई होती है। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। 44 लोगों पर केस दर्ज होना तो शुरुआत है, लेकिन असली न्याय तभी मिलेगा जब सभी दोषियों को सजा मिले।

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