मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक बड़ा छिंदवाड़ा विधायक निधि घोटाला सामने आया है जो सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोलता है। जुन्नारदेव जनपद पंचायत में जो कुछ हुआ वो सुनकर आपको भी यकीन नहीं होगा। अधिकारियों ने मिलकर ऐसा खेल खेला कि शिवभक्तों के चंदे से बन रहे मंदिर के ढांचे को ही सरकारी कागजों में सामुदायिक भवन बता दिया और करोड़ों की सरकारी राशि हड़प ली।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यहां 24 लाख रुपये की स्वीकृत राशि से एक मंगल भवन (सामुदायिक भवन) बनना था। लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही थी। अधिकारियों ने बिना कोई असली निर्माण कराए, बिना मजदूरों को पैसे दिए और बिना कोई ले-आउट तैयार किए, सिर्फ कागजों पर निर्माण सामग्री दिखाकर लगभग 16 लाख रुपये की राशि निकाल ली।
मौके पर जाकर देखें तो वहां सिर्फ 15 खंभों का एक कच्चा ढांचा नजर आता है, जो असल में एक मंदिर का ढांचा है जिसे स्थानीय शिव भक्त अपने चंदे से बनवा रहे थे। इसी ढांचे को सरकारी अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में ‘सामुदायिक भवन’ बता दिया और करोड़ों रुपये की धांधली कर डाली।
जांच में भी हुई धांधली की कोशिश
जब इस छिंदवाड़ा विधायक निधि घोटाला की शिकायतें आने लगीं तो शुरुआती जांच में भी गड़बड़ी छिपाने की कोशिश की गई। जिला योजना अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में इसी धार्मिक ढांचे को ‘मंगल भवन निर्माण प्रगति पर है’ बताकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की। लेकिन जैसे-जैसे मामला उजागर होता गया, अधिकारियों की पोल खुलती चली गई।
कलेक्टर ने लिया सख्त एक्शन
जब पूरा मामला छिंदवाड़ा कलेक्टर हरेंद्र नारायण के सामने आया तो उन्होंने तुरंत सख्त रुख अपनाया। कलेक्टर साहब ने दोनों जांच रिपोर्टों की फाइल खंगाली और उसमें साफ-साफ गड़बड़ी पकड़ में आ गई। उन्होंने फौरन ही 6 जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए।
इन 6 अधिकारियों में जनपद CEO, सरपंच और इंजीनियर समेत सभी शामिल हैं जो इस घोटाले में सीधे तौर पर शामिल थे। कलेक्टर ने इन सभी से अवैध रूप से खर्च की गई पूरी 16 लाख रुपये की राशि वसूलने के नोटिस जारी किए हैं। साथ ही उनके खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
सीमेंट की कीमत को लेकर भी हुआ बवाल
इस बीच मीडिया में एक और चौंकाने वाली खबर चली कि इस भवन में एक बोरी सीमेंट की कीमत 1.92 लाख रुपये दिखाई गई है। हालांकि, जिला पंचायत CEO ने इस बात का खंडन करते हुए बताया कि यह भ्रामक जानकारी है। असल में यह 1.92 लाख रुपये की राशि 600 बोरी सीमेंट की कुल कीमत है, जिसमें GST भी शामिल है।
लेकिन CEO ने यह बात मान ली कि भवन निर्माण में भारी लापरवाही हुई है और जो बना है वह स्वीकृत डिजाइन से बिल्कुल अलग है। इसी वजह से दोषी अधिकारियों पर वसूली और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
क्यों अहम है यह मामला?
यह छिंदवाड़ा विधायक निधि घोटाला सिर्फ एक स्थानीय मामला नहीं है। यह दिखाता है कि कैसे सरकारी योजनाओं के नाम पर आम जनता का पैसा लूटा जा रहा है। विधायक निधि जैसी योजनाएं जो लोगों के विकास के लिए बनी हैं, उन्हीं में अधिकारी मिलकर घोटाले कर रहे हैं।
कलेक्टर हरेंद्र नारायण की इस सख्त कार्रवाई से एक संदेश गया है कि अब भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि ऐसे कितने मामले अभी भी दबे पड़े हैं जिनका खुलासा नहीं हो पाया है?
छिंदवाड़ा की यह घटना एक चेतावनी है उन सभी अधिकारियों के लिए जो सरकारी पैसों को अपनी जेब समझते हैं। अब समय आ गया है कि हर सरकारी योजना की पारदर्शी निगरानी हो और दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिले।















