मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में एक बार फिर Cyber Fraud Indore का बड़ा मामला सामने आया है। इस बार ठगों का शिकार बने MGM मेडिकल कॉलेज से रिटायर्ड एक बुजुर्ग डॉक्टर, जिनसे साइबर अपराधियों ने करीब साढ़े चार करोड़ रुपए ऐंठ लिए। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे घोटाले में एक बैंक मैनेजर भी शामिल निकला है।
कैसे शुरू हुई ठगी की कहानी?
बुजुर्ग डॉक्टर को अचानक एक फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को CBI का अधिकारी बताया। उन्होंने डॉक्टर साहब को डराते हुए कहा कि मुंबई के कारोबारी नरेश गोयल के नाम पर उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। डरे-सहमे बुजुर्ग को ठगों ने इस कदर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया कि वे पूरी तरह से उनके झांसे में आ गए।
आरोपियों ने डॉक्टर को बताया कि उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” कर दिया गया है और अब उन्हें घर से बाहर नहीं निकलना है। इस तरह करीब एक महीने तक बुजुर्ग डॉक्टर को वर्चुअल हाउस अरेस्ट जैसे माहौल में रखा गया।
फर्जी ऑनलाइन कोर्ट में हुई पेशी
Cyber fraud indore के इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ठगों ने एक नकली ऑनलाइन कोर्ट का भी इंतजाम किया था। बुजुर्ग डॉक्टर को वीडियो कॉल पर एक फर्जी कोर्ट में पेश किया गया, जहां किसी ने जज बनकर उन्हें सुनवाई का ड्रामा दिखाया। साइबर सेल की जांच में पता चला कि यह फर्जी कोर्ट की लिंक कंबोडिया से ऑपरेट हो रही थी।
इस दौरान आरोपियों ने डॉक्टर साहब पर मानसिक दबाव बनाते हुए उनसे एफडी तुड़वाई और अलग-अलग बैंक खातों में करोड़ों रुपए ट्रांसफर करवा लिए।
बैंक मैनेजर की सूझबूझ से बची बाकी रकम
जब बुजुर्ग डॉक्टर अपनी एफडी तुड़वाने के लिए बैंक पहुंचे, तो बैंक मैनेजर को कुछ गड़बड़ लगी। उन्होंने डॉक्टर साहब से सारी बात पूछी और तुरंत उनके परिजनों को सूचित किया। इसके बाद परिवार वालों ने मध्य प्रदेश साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। अगर बैंक मैनेजर ने यह सतर्कता नहीं दिखाई होती, तो शायद और भी बड़ी रकम लुट जाती।
SBI ब्रांच मैनेजर निकला मुख्य आरोपी
राज्य साइबर सेल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें उज्जैन के SBI ब्रांच मैनेजर सादिक पटेल, साहिल और सोहेल शामिल हैं। जांच में खुलासा हुआ कि ठगी की रकम इन्हीं के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी।
सबसे बड़ा झटका तब लगा जब पता चला कि SBI के ब्रांच मैनेजर सादिक पटेल ने कमिशन के लालच में अपने बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराए थे। एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का इस तरह के अपराध में शामिल होना पूरे बैंकिंग सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
पैसा विदेश भेजने का खुला नेटवर्क
साइबर सेल की जांच में पता चला कि ठगी की रकम उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हैदराबाद समेत देश के कई राज्यों के बैंक खातों से होते हुए विदेश भेजी गई। यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा प्रतीत होता है, जो भारत में साइबर ठगी को अंजाम देकर पैसा विदेशों में ट्रांसफर कर देता है।
अब तक साइबर सेल ने आरोपियों के खातों में जमा 3 लाख 78 हजार रुपए फ्रीज कर दिए हैं। हालांकि यह रकम कुल ठगी की राशि के मुकाबले बहुत कम है, लेकिन अधिकारियों को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर और पैसा रिकवर हो सकेगा।
आगे और बड़े खुलासे की संभावना
मध्य प्रदेश साइबर सेल के अधिकारियों का कहना है कि यह एक हाई-प्रोफाइल cyber fraud indore रैकेट है और जल्द ही इसमें और भी बड़े खुलासे होंगे। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
आम लोगों के लिए सीख
इस घटना से सभी को सबक लेने की जरूरत है। याद रखें कि:
- कोई भी सरकारी अधिकारी फोन पर “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करता
- CBI, ED, Income Tax जैसी एजेंसियां वीडियो कॉल पर नोटिस नहीं भेजतीं
- किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक खाते की जानकारी न दें
- बड़ी राशि निकालने या ट्रांसफर करने से पहले परिवार या बैंक अधिकारी से सलाह लें
Cyber fraud indore जैसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जागरूकता ही इससे बचाव का एकमात्र रास्ता है। साइबर अपराधियों के झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज की तुरंत साइबर सेल को रिपोर्ट करें।
















