नई दिल्ली। देश के सभी स्कूलों में अब कक्षा 3 से ही बच्चों को Artificial Intelligence (AI) की पढ़ाई कराई जाएगी। केंद्र सरकार ने कहा है कि एआई को शुरुआती स्तर से पढ़ाने की यह पहल शिक्षा प्रणाली में तकनीकी समझ को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह पहल बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने और एआई के नैतिक (ethical) उपयोग की समझ विकसित करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।
क्या है इस पहल का उद्देश्य
शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि अब समय आ गया है कि बच्चे सिर्फ किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें तकनीक की दुनिया से भी जोड़ा जाए। मंत्रालय के मुताबिक, Artificial Intelligence in Schools पहल बच्चों में रचनात्मक सोच (creative thinking), समस्या समाधान (problem solving) और कंप्यूटेशनल सोच (computational thinking) की क्षमता विकसित करेगी।
एआई को कक्षा 3 से ही सिलेबस में शामिल किया जाएगा ताकि बच्चे छोटे से ही यह समझ सकें कि मशीनें कैसे सोचती हैं, निर्णय कैसे लेती हैं और तकनीक का सही उपयोग किस तरह किया जा सकता है।
AI पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए समिति गठित
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने IIT मद्रास के प्रोफेसर कार्तिक रमन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई है, जो एआई और कम्प्यूटेशनल सोच पर आधारित पाठ्यक्रम तैयार करेगी।
इस समिति में NCERT, KVS, NVS, और बाहरी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। हाल ही में नई दिल्ली में एक बड़ा हितधारक परामर्श (Stakeholder Consultation) आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों और शिक्षकों ने इस पहल पर अपने सुझाव दिए।
शिक्षा मंत्रालय ने क्या कहा
स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने कहा,
“अब एआई को शिक्षा का हिस्सा बनाना एक विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है। हमें बच्चों को इस तरह तैयार करना होगा कि वे एआई को समझ सकें, उसका जिम्मेदारी से इस्तेमाल कर सकें और आने वाले समय में नई तकनीक के साथ कदम से कदम मिला सकें।”
उन्होंने यह भी बताया कि Artificial Intelligence in Schools को एक “बुनियादी सार्वभौमिक कौशल” (fundamental universal skill) के रूप में देखा जाना चाहिए, जो भविष्य की नौकरियों और नवाचार (innovation) में अहम भूमिका निभाएगा।
शिक्षा के डिजिटल रूपांतरण की दिशा में कदम
नई शिक्षा नीति (NEP 2020) में पहले ही डिजिटल शिक्षा और तकनीक को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। अब केंद्र सरकार का यह कदम उस दिशा में अगला ठोस कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बच्चे शुरुआती कक्षाओं में ही एआई जैसी तकनीकों की मूल बातें सीखेंगे, तो वे आगे चलकर डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसे विषयों में बेहतर समझ विकसित कर पाएंगे।
भविष्य की तैयारी अभी से
सरकार का मानना है कि एआई भविष्य की नहीं बल्कि आज की जरूरत है। उद्योगों, स्वास्थ्य, कृषि, और शिक्षा — हर क्षेत्र में इसका दखल बढ़ रहा है। ऐसे में बच्चों को एआई की समझ देना उन्हें “फ्यूचर रेडी” बनाएगा।
शिक्षकों के लिए भी इस पाठ्यक्रम से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे ताकि वे बच्चों को बेहतर तरीके से एआई की जानकारी दे सकें।
शिक्षा में तकनीकी क्रांति की शुरुआत
केंद्र सरकार की यह पहल भारत के शिक्षा तंत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। अब जब Artificial Intelligence in Schools के रूप में तकनीक बच्चों की पढ़ाई का हिस्सा बनेगी, तो आने वाले समय में देश के छात्र न सिर्फ तकनीकी रूप से सक्षम होंगे, बल्कि नवाचार और रिसर्च की दिशा में भी नई ऊंचाइयां छुएंगे।
Input Source: PB Shabd
















