- जनजातीय विभाग ने टूर्नामेंट एक दिन में निपटाया।
- अधिकारी खुद बने चीफ गेस्ट, खिलाड़ियों ने जताई नाराज़गी।
- कांग्रेस ने अफसरशाही पर भड़कते हुए जांच की मांग की।
MP Taekwondo: अक्सर हम सुनते हैं कि सरकारें आदिवासियों और खेलों को बढ़ावा देने के लिए बड़े-बड़े दावे करती हैं, पर ज़मीन पर हकीकत कुछ और ही होती है। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में कुछ ऐसा ही हुआ है, जिसने सरकारी महकमों की पोल खोलकर रख दी है। यहां जनजातीय कार्य विभाग ने राज्य स्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता का जो हाल किया, उसे देखकर लगता है कि इन अधिकारियों को न आदिवासियों की फिक्र है, न खिलाड़ियों के भविष्य की!
यह सिर्फ एक खेल आयोजन की बात नहीं है, यह अधिकारी वर्ग की मनमानी, सियासी उपेक्षा और खिलाड़ियों की प्रतिभा से खिलवाड़ का जीता-जागता उदाहरण है।
मनमानी की खुली दास्तान: चीफ गेस्ट की कुर्सी पर खुद बैठे ‘साहब’!
दरअसल, आदिवासी बहुल उमरिया जिले में पहली बार जनजातीय कार्य विभाग द्वारा राज्य स्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह आयोजन आदिवासी उत्थान और खेलों को बढ़ावा देने के नेक मकसद से होना था, पर हुआ ठीक इसका उल्टा।
सूत्रों के मुताबिक, आयोजनकर्ताओं की लापरवाही ने पूरे कार्यक्रम का मज़ा किरकिरा कर दिया। सबसे बड़ी बात तो यह हुई कि जिस जगह मुख्य अतिथि (चीफ गेस्ट) को बैठना था, वहां खुद आयोजन से जुड़े अधिकारी विराजमान हो गए! यह तो सीधे-सीधे संदेश था—”अब हमसे बड़ा कोई नहीं!”
इस पूरे घटनाक्रम ने जिले की राजनीति में भी उबाल ला दिया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष इंजीनियर विजय कोल ने इसे सीधे-सीधे “भाजपा के राज में आदिवासियों का अपमान” करार दिया है।
जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा, देवी-देवताओं का अपमान!
यह जिला आदिवासी बहुल है। स्वाभाविक था कि ऐसे बड़े आयोजन में स्थानीय आदिवासी जनप्रतिनिधियों को मान-सम्मान के साथ बुलाया जाता, पर अधिकारी वर्ग इतना हावी रहा कि न कोई प्रचार-प्रसार हुआ और न ही किसी जनप्रतिनिधि को न्योता मिला!
मान लीजिए, अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों से कोई ‘दिक्कत’ रही हो, पर उन्होंने धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई। कार्यक्रम स्थल पर मंच और ग्राउंड तो बनाया गया, जहां पूजन के लिए माता सरस्वती की प्रतिमा भी रखी गई थी। पर, आश्चर्य की बात यह है कि उनकी पूजा-अर्चना तक नहीं की गई!
आयोजन देखने पहुंचे 21 जिलों के खिलाड़ी भी यह सब देखकर हक्के-बक्के रह गए।
दो दिन का टूर्नामेंट, एक दिन में ही ‘समाप्त’
खेल आयोजनों के नियम कायदे होते हैं, पर यहां तो अफ़सरशाही हावी रही। जो राज्य स्तरीय प्रतियोगिता दो दिन (शुरुआत में 2 और 3 अक्टूबर) तक चलनी थी, उसे मनमर्ज़ी से एक ही दिन में खत्म कर दिया गया!
यानी, आयोजनकर्ता भी वही, और चीफ गेस्ट भी वही!
मामला बिगड़ने पर कार्यक्रम प्रभारी राम कुशल पांडेय से जब बात की गई, तो उन्होंने अजीबोगरीब सफाई दी।
उन्होंने बताया कि यह जनजातीय कार्य विभाग की विभागीय प्रतियोगिता है, जो 2 से 3 अक्टूबर को होनी थी, पर दशहरे के कारण बच्चे चले गए थे। इसलिए, उन्होंने ‘गैप का फायदा’ उठाकर इसे अपने हिसाब से 8 से 11 तारीख के बीच देवास में तय कर लिया, और इस बीच यहां करवा दिया।
सबसे चौंकाने वाला जवाब तब आया, जब उनसे आयुक्त का संशोधन पत्र पूछा गया। उन्होंने साफ कहा कि “कोई पत्र तो हमारे पास नहीं है क्योंकि सत्य सनातन धर्म का पर्व दशहरा होने के कारण हम लोगों ने अपने से कर लिया।”
और चीफ गेस्ट के सवाल पर तो वे बग़लें झाँकने लगे, और बोले कि “हमने अपनी सहायक आयुक्त को ही चीफ गेस्ट रख लिया था।” यह सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन और मनमानी है।
प्रतिभागी भी हैरान: “एक दिन में ही सिलेक्शन!”
जल्दबाजी और मनमानी का खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ा। बालाघाट जिले के बैहर से आई प्रतिभागी ऋषा पांडे ने बताया कि:
- “हमारा ताइक्वांडो का गेम था, हम लोग कल आए थे।”
- “गेम आज (एक दिन) था, कोई और टीम नहीं आई थी, इसलिए हम लोगों का (आठ लोगों) का सिलेक्शन हो गया है।”
- “लड़कियों की कोई टीम नहीं आई, लड़कों की टीम आई थी जिसमें तीन हम लोग हैं और सभी का सिलेक्शन हो गया है।”
सोचिए, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अगर टीमें ही नहीं आईं, और एक दिन में ही सिलेक्शन हो जाए, तो क्या खिलाड़ियों को सही मायनों में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला? यह तो टोकन गेम जैसा हो गया, जहाँ खानापूर्ति करके काम खत्म कर दिया गया।
कांग्रेस का वार: “बजट का बंदरबाँट होगा!”
इस पूरे घटनाक्रम ने भ्रष्टाचार और अधिकारी वर्ग के दुस्साहस पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष इंजीनियर विजय कोल ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा:
भाजपा का कुशासन है, जो कहती है वो करती नहीं है। इस कार्यक्रम में न कोई चीफ गेस्ट था और न कोई अधिकारी। वहां का खेल अधिकारी खुद को आरएसएस का मानता है और उसी दबंगई में न दीप प्रज्वलित करता है, न विधिवत कोई कार्य करता है।
उन्होंने आगे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
2 दिन के बजट का जो पैसा था, उसको एक दिन में ही खत्म करके बाकी पैसे का भ्रष्ट अधिकारियों के बीच बंदरबाँट होगा।
कोल ने साफ मांग की है कि:
हम कांग्रेस पार्टी की तरफ से मांग करते हैं कि इस कार्यक्रम के आयोजन में जो भी अधिकारी जिम्मेदार हैं, उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो ताकि आने वाले समय में खिलाड़ियों को सही ढंग से मौका मिल सके।
ज़रूरी है कड़ा एक्शन
यह मामला सिर्फ खेल विभाग या जनजातीय कार्य विभाग की बदनामी का नहीं है। यह आदिवासी खिलाड़ियों की मेहनत और प्रदेश की प्रतिभाओं के हनन का है। जिस राज्य स्तरीय मंच से खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलनी चाहिए थी, वहां उन्हें उपेक्षा और निराशा मिली।
- मनमानी करना
- नियमों को ताक पर रखना
- प्रतिनिधियों को न बुलाना
- बजट का दुरुपयोग करना
ये सब दिखाता है कि अफ़सरशाही ने सारे नियम खुद बना लिए हैं। ऐसे में, सरकार को चाहिए कि वह जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी प्रदेश का नाम डुबाने और खिलाड़ियों के सपनों को कुचलने की हिम्मत न जुटा सके। आदिवासियों और खेलों को सचमुच आगे बढ़ाना है, तो सबसे पहले ईमानदार व्यवस्था लानी होगी।














