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छिंदवाड़ा परासिया में Child Kidney Failure का मामला — 9 बच्चों की मौत, कफ सीरप पर सवाल

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के परासिया में Child Kidney Failure से अब तक 9 बच्चों की मौत। प्रशासन जांच में जुटा, कफ सीरप संदिग्ध। पूर्व CM कमलनाथ ने जताया गहरा दुख और कड़ा कदम उठाने की मांग।

Updated at: Sat, 04 Oct 2025, 7:06 AM (IST)
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हाइलाइट्स
  • परासिया में Child Kidney Failure से 9 बच्चों की मृत्यु।
  • कफ सीरप में ब्रेक ऑयल मिलने की पुष्टि हुई है।
  • प्रशासन ने दोषियों को पकड़ने के लिए जांच तेज़ कर दी है।

मध्य प्रदेश: छिंदवाड़ा जिले के परासिया में एक दुखद और गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ पिछले कुछ दिनों में बच्चों में Kidney Failure यानी किडनी फेलियर के मामले बढ़ते जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, अब तक 9 बच्चों की मौत हो चुकी है। यह खबर पूरे प्रदेश में चिंता की वजह बनी हुई है।

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परासिया एसडीएम प्रशिक्षु, आईएएस शुभम यादव ने मीडिया को जानकारी दी कि प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए अब तक लगभग 1420 बच्चों की स्क्रीनिंग की है। उन्होंने बताया कि पानी और चूहे के नमूने लैब में जांच के लिए भेजे गए थे, लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव आई है। साथ ही, कफ सीरप के संदिग्ध बैच की रिपोर्ट आना अभी बाकी है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कैसे बच्चों में इतनी जल्दी Kidney Failure जैसी गंभीर समस्या फैल गई। इस सवाल का जवाब खोजने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग जांच में जुटे हैं।

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पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की प्रतिक्रिया

इस दुखद घटना पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर लिखा कि यह मामला न सिर्फ छिंदवाड़ा बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गंभीर चेतावनी है।

कमलनाथ ने कहा कि अब तक 7 बच्चों की मौत एक विषाक्त कफ सीरप पीने के कारण हुई है। उनके शब्दों में, यह “झकझोर देने वाली जानकारी” है कि कफ सीरप में ब्रेक ऑयल का सोल्वेंट मिलाया गया है, जो अत्यंत ज़हरीला है।

उन्होंने सवाल उठाया कि कैसे बच्चों की दवा में इस तरह की खतरनाक मिलावट हो सकती है और उस पर समय रहते कोई रोक नहीं लगाई गई। उनका यह भी कहना है कि यह मामला प्रदेश में कानून व्यवस्था और प्रशासन की गंभीर कमी को दिखाता है।

कमलनाथ ने सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की है — उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिक रही सभी दवाओं पर सख़्त निगरानी होनी चाहिए। साथ ही, खाने-पीने की चीज़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए।

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स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई

परासिया प्रशासन फिलहाल हर संभव कदम उठा रहा है। मृत बच्चों के परिवारों से बातचीत की जा रही है और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्क्रीनिंग में जिन बच्चों को Kidney Failure के लक्षण मिले हैं, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

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आईएएस शुभम यादव ने कहा कि प्रशासन हर स्तर पर जांच कर रहा है और दोषियों को जल्द पकड़कर सख़्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल सभी संदिग्ध कफ सीरप के बैच को बाजार से जब्त कर लिया गया है।

इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग बच्चों के इलाज के लिए विशेष टीम लगा चुका है। प्रभावित इलाकों में डॉक्टरों की तैनाती की गई है और लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

माता-पिता और स्थानीय लोगों की चिंता

परासिया के लोग इस मामले को लेकर गहरे सदमे में हैं। कई माता-पिता ने बताया कि बच्चों को खांसी और जुकाम के इलाज के लिए इस्तेमाल किए गए कफ सीरप के बाद उनके बच्चों की हालत बिगड़ी। कुछ परिवारों का कहना है कि अस्पतालों में इलाज के दौरान उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई।

स्थानीय लोग प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही, दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकारी निगरानी को मजबूत करने की आवाज भी उठ रही है।

Child Kidney Failure: एक गंभीर समस्या

Kidney Failure बच्चों के लिए बहुत खतरनाक है। यह समस्या आमतौर पर गंभीर संक्रमण, विषाक्त पदार्थों या गलत दवा के सेवन के कारण उत्पन्न होती है। बचपन में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर इलाज काफी मुश्किल और महंगा होता है।

डॉक्टरों का कहना है कि समय पर सही इलाज और जांच ना होने पर यह समस्या जानलेवा बन सकती है। इसीलिए इस मामले में प्रशासन की तेज़ और सटीक कार्रवाई बेहद ज़रूरी है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

कमलनाथ के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में भी यह मामला गर्म हो गया है। विपक्ष और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस घटना को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि प्रदेश में दवा सुरक्षा व्यवस्था क्यों ढीली है।

सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को उठाया है और बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी अभियान चलाने की मांग की है।

बच्चों की जान सबसे अहम

यह दुखद मामला हमें याद दिलाता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए दवा की गुणवत्ता और सरकारी निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है। कफ सीरप जैसी आम दवाओं में भी मिलावट जानलेवा साबित हो सकती है।

स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है कि वे जल्दी से जल्दी इस मामले की गहराई से जांच करें और दोषियों को क़ानून के तहत सजा दिलाएं। साथ ही, प्रदेश में दवाओं की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों।

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