विज्ञापन
---Advertisement---

2025 एशिया कप: इंडिया vs पाकिस्तान, क्यों टीम इंडिया ने ठुकराई ट्रॉफी?

2025 एशिया कप फाइनल में इंडिया vs पाकिस्तान मुकाबला सिर्फ खेल नहीं, बल्कि राजनीति का एक बड़ा ड्रामा बन गया। जानिए क्यों टीम इंडिया ने जीत के बाद ट्रॉफी लेने से इनकार किया और क्या है इस विवाद के पीछे की असली वजह।

Updated at: Mon, 29 Sep 2025, 11:35 AM (IST)
Follow Us:
---Advertisement---
हाइलाइट्स
  • फाइनल में खेल नहीं, राजनीति ने बाज़ी मार ली।
  • टीम इंडिया ने जीत के बाद ट्रॉफी ठुकराकर इतिहास रचा।
  • ट्रॉफी गायब, लेकिन भारत की जीत अमर बन गई।

2025 एशिया कप का फाइनल मुकाबला सिर्फ क्रिकेट का खेल नहीं था, बल्कि यह मैदान में शुरू होकर कूटनीतिक गलियारों तक पहुँचा एक भयंकर सियासी ड्रामा था। दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान जब आमने-सामने थे, तो दुनिया ने सिर्फ छक्के-चौके नहीं देखे, बल्कि खेल भावना की धज्जियाँ उड़ते भी देखीं। यह फाइनल 41 साल के एशिया कप इतिहास में इन दो चिर-प्रतिद्वंद्वियों के बीच पहला खिताबी मुकाबला था , और इसमें खेल से ज़्यादा राजनीति, उकसावे (sledging) और एक अभूतपूर्व ट्रॉफी विवाद की चर्चा हुई।

विज्ञापन

भारतीय टीम ने भले ही 5 विकेट से यह खिताबी जंग जीत ली, लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह क्रिकेट की दुनिया में शायद ही पहले कभी देखा गया हो। कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में टीम इंडिया ने जीत के बाद चैम्पियन ट्रॉफी उठाने से इनकार कर दिया, जिससे एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के मुखिया मोहसिन नकवी को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। इस पूरी घटना ने India vs Pakistan Asia Cup Final Controversy को एक ऐसा आयाम दिया, जिसकी गूँज अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक सुनाई दे रही है।

भाग 1: प्रस्तावना – क्रिकेट और कूटनीति का अभूतपूर्व टकराव

यह फाइनल मैच शुरू होने से पहले ही तनाव और विवादों की मोटी परत चढ़ चुकी थी। मैदान पर खिलाड़ियों के बीच प्रतिद्वंद्विता तो स्वाभाविक है, लेकिन इस मुकाबले से पहले और दौरान जो हुआ, वह दिखाता है कि दोनों देशों के बीच तनाव खेल के दायरे से बाहर निकलकर सीधे तौर पर राजनीति से जुड़ चुका था।

विज्ञापन

1.1. विवादों की नींव: ‘नो-हैंडशेक’ पॉलिसी और Pycroft विवाद

मैच से पहले ही एक स्पष्ट संदेश दे दिया गया था: भारत और पाकिस्तान के बीच इस टूर्नामेंट में तीनों मैचों के दौरान किसी भी प्रकार का औपचारिक अभिवादन या हाथ मिलाना नहीं होगा । यह सामान्य शिष्टाचार से हटना एक स्पष्ट राजनीतिक विरोध था, जो भारतीय टीम की ओर से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी की राजनीतिक पृष्ठभूमि के विरोध में एक कड़ा स्टैंड था। खिलाड़ी सीधे तौर पर एक-दूसरे से हाथ मिलाने से बच रहे थे, जिसके कारण पाकिस्तान के खिलाड़ियों को ग्रुप में खड़े होकर भारतीय टीम का इंतज़ार करना पड़ा, जबकि भारतीय खिलाड़ी सीधे ड्रेसिंग रूम में चले गए ।

इस माहौल को और भी ज़्यादा गर्म करने वाला एक महत्वपूर्ण मोड़ मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट विवाद था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाइक्रॉफ्ट ने निजी तौर पर दोनों टीमों के कप्तानों को सलाह दी थी कि वे तनाव कम करने के लिए हाथ मिलाने से बचें । लेकिन जब भारत ने मैच के बाद भी इस शिष्टाचार को निभाने से साफ इनकार कर दिया, तो पाकिस्तान टीम को लगा कि उन्हें जानबूझकर नीचा दिखाया गया है।

1.2. Pycroft विवाद पर पाकिस्तान का पलटवार

विज्ञापन

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने इस मामले पर ज़ोरदार आपत्ति जताई। PCB ने आरोप लगाया कि पाइक्रॉफ्ट ने ही उन्हें शिष्टाचार निभाने से रोका था, हालांकि ICC ने इस दावे को ख़ारिज कर दिया था । PCB ने विरोधस्वरूप पाइक्रॉफ्ट को टूर्नामेंट से हटाने की मांग कर दी और यहाँ तक कि UAE के खिलाफ अपने अगले मैच का बहिष्कार करने की भी धमकी दे डाली । इस गतिरोध के चलते वह मैच एक घंटे से भी ज़्यादा देर तक रुका रहा, जिसके बाद आपातकालीन बातचीत करनी पड़ी।

विज्ञापन

यह घटना दिखाती है कि PCB—जिसकी बागडोर मोहसिन नकवी के हाथ में है—खेल के मैदान से इतर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था। पाइक्रॉफ्ट को हटाने की धमकी और मैच बहिष्कार की चेतावनी देना यह साबित करता है कि उनका उद्देश्य सिर्फ खेल की शिकायत करना नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की ‘नो-हैंडशेक’ नीति को एक नकारात्मक मुद्दा बनाकर पेश करना था। ये शुरुआती घटनाएँ ही India vs Pakistan Asia Cup Final Controversy की नींव थीं, जहाँ खेल नियमों से ज़्यादा राजनीतिक दाँव-पेंच महत्वपूर्ण हो गए थे।

भाग 2: टॉस, पाकिस्तान का स्कोर और कुलदीप का निर्णायक वार

तमाम तनाव के बावजूद, जब खेल शुरू हुआ, तो दोनों टीमों ने पूरी जान लगा दी। भारत ने टॉस जीता और कप्तान सूर्यकुमार यादव ने दुबई की परिस्थितियों को देखते हुए पहले गेंदबाज़ी करने का फ़ैसला किया ।

2.1. पाकिस्तान का मजबूत आगाज़ और आक्रामक उकसावा

पाकिस्तान की शुरुआत शानदार रही। ओपनर साहिबजादा फरहान (57 रन) और फखर ज़मान (46 रन) ने भारतीय गेंदबाज़ों को कोई मौका नहीं दिया और पहले विकेट के लिए 113 रन की एक मज़बूत साझेदारी की । एक समय लग रहा था कि पाकिस्तान आसानी से 180-190 का स्कोर खड़ा कर देगा।

लेकिन इस साझेदारी के दौरान ही मैदान पर विवादों का नया दौर शुरू हो गया। जैसे ही साहिबजादा फरहान ने अपना अर्धशतक पूरा किया, उन्होंने दर्शकों की ओर एक अत्यधिक विवादास्पद इशारा किया—उन्होंने अपनी बैट को बंदूक की तरह पकड़ा और गोली चलाने का संकेत दिया, जिसे ‘गन सेलिब्रेशन’ कहा गया । यह इशारा बेहद उत्तेजक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील था, जिसने मैदान के माहौल को तुरंत गर्म कर दिया। इससे पहले भी, भारत के ओपनर अभिषेक शर्मा ने दर्शकों की ओर ‘L’ (Loser) का इशारा किया था, जो बताता है कि दोनों तरफ से मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिशें जारी थीं ।

2.2. कुलदीप यादव का विध्वंस और नाटकीय पतन

जब पाकिस्तान 113/1 के स्कोर पर मज़बूत स्थिति में था, तब भारत के स्पिनरों ने मैच का रुख पूरी तरह पलट दिया। इस ‘मैजिक स्पेल’ का नेतृत्व किया कुलदीप यादव ने, जिन्होंने अपने कोटे के ओवरों में सिर्फ 30 रन देकर 4 महत्वपूर्ण विकेट लिए ।

कुलदीप की घातक फिरकी के सामने पाकिस्तान का मध्यक्रम ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। फखर ज़मान का विकेट (जो एक लापरवाह शॉट पर आउट हुए) इस पतन का प्रतीक था। इसके बाद हुसैन तलत भी अक्षर पटेल का शिकार बने। पाकिस्तान ने सिर्फ 33 रन जोड़कर अपने 9 विकेट गंवा दिए, और पूरी टीम 19.1 ओवर में केवल 146 रन बनाकर ऑल आउट हो गई ।

पाकिस्तान का यह नाटकीय पतन न सिर्फ़ खेल के लिहाज़ से एक बड़ी विफलता थी, बल्कि इसने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को मानसिक रूप से अत्यधिक भावनात्मक और प्रतिक्रियात्मक (Reactive) बना दिया। इतनी बड़ी बढ़त गंवा देने की निराशा ने उन्हें बाद में हारिस रऊफ जैसे खिलाड़ियों को और भी ज़्यादा आक्रामक और भड़काने वाले इशारे करने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि वे अब खेल से बाहर के तरीकों से मनोवैज्ञानिक जंग जीतना चाहते थे।

यह रही दोनों पारियों का संक्षिप्त सार:

Table 1: एशिया कप फाइनल 2025: मैच का सार

पारीटीमस्कोरसर्वोच्च बल्लेबाज (रन, गेंद)सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज (विकेट/रन)पारी का टर्निंग पॉइंट
1पाकिस्तान146 All Out (19.1 Ov)साहिबजादा फरहान (57, 38)कुलदीप यादव (4/30)113/1 से 146 All Out
2भारत150/5 (19.4 Ov)तिलक वर्मा (69*, 53)शाहीन शाह अफरीदी/हारिस रऊफतिलक-दुबे की 60 रन की साझेदारी

भाग 3: हारिस रऊफ का ‘क्रैश जेस्चर’ और बल्लेबाज़ों का ज़ुबानी पलटवार

147 रनों के छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत ख़राब रही। लेकिन मैच का असली ड्रामा उस समय शुरू हुआ जब पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज़ों ने गेंद की बजाय ज़ुबान से ज़्यादा हमला करना शुरू किया।

3.1. रऊफ की गुंडागर्दी और मोहसिन नकवी कनेक्शन

पाकिस्तान के फायरब्रांड पेसर हारिस रऊफ ने पूरे मैच के दौरान भारतीय बल्लेबाज़ों को लगातार उकसाया। लेकिन उनका सबसे विवादास्पद इशारा था ‘प्लेन क्रैश’ (Aircraft-crash) का जेस्चर । यह इशारा न सिर्फ़ खेल भावना के खिलाफ़ था, बल्कि यह मैदान के बाहर की राजनीतिक बयानबाज़ी से जुड़ा हुआ महसूस हुआ।

इस इशारे को PCB प्रमुख और पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी के सोशल मीडिया पोस्ट से जोड़कर देखा गया। नकवी ने खुद हाल ही में एक क्रिप्टिक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें क्रिस्टियानो रोनाल्डो का गोल सेलिब्रेशन था, जिसे कुछ लोगों ने विमान दुर्घटना से जोड़ा था । इस तरह के उच्च-स्तरीय राजनीतिक व्यक्तियों द्वारा उकसावे को बढ़ावा देने के संकेत ने यह साबित किया कि मैदान पर हो रही यह गुंडागर्दी व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक संस्थागत (Institutional) तनाव को दर्शाती थी।

3.2. भारतीय बल्लेबाज़ों का करारा मौखिक जवाब

भारत ने पाकिस्तान के उकसावे का जवाब सिर्फ बल्ले से नहीं, बल्कि ज़ुबान से भी देना शुरू कर दिया। भारतीय बल्लेबाज़ों ने पलटवार करते हुए साफ़ संदेश दिया कि वे इस मनोवैज्ञानिक युद्ध में पीछे हटने वाले नहीं हैं। जब अभिषेक शर्मा आउट हुए, तो उन्होंने ‘L’ (Loser) का इशारा किया ।

इसके अलावा, शुभमन गिल और अभिषेक शर्मा दोनों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को साफ संदेश दिया कि “तुम बातें करते हो, हम जीतते हैं” (“You talk, we win”) और “खेल बोलता है, शब्द नहीं” । भारतीय बल्लेबाज़ों की यह प्रतिक्रिया एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक बदलाव को दर्शाती है। जहां भारतीय टीम ने राजनीतिक विरोध दर्ज कराने के लिए ‘नो-हैंडशेक’ की नीति अपनाई थी, वहीं मैदान पर उन्होंने पाकिस्तानी आक्रामकता का मुकाबला सक्रिय, लेकिन नियंत्रित जवाबी कार्रवाई से किया। यह स्पष्ट था कि भारतीय टीम न केवल मैच जीतने पर केंद्रित थी, बल्कि वह किसी भी तरह से दबने या मनोवैज्ञानिक दबाव में आने को तैयार नहीं थी, जिसने बाद में ट्रॉफी के विरोध के लिए ज़मीन तैयार की।

3.3. ICC का हस्तक्षेप और जुर्माना

मैदान पर बढ़ती शत्रुता को देखते हुए, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को हस्तक्षेप करना पड़ा। ICC ने हारिस रऊफ पर उनके विवादास्पद इशारों और व्यवहार के लिए मैच फीस का 30% जुर्माना लगाया। साथ ही, भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव पर भी संहिता के उल्लंघन के लिए 30% मैच फीस का जुर्माना लगाया गया । यह टूर्नामेंट में खेल भावना के उल्लंघन के लिए लगाया गया एक स्पष्ट दंड था।

भाग 4: तिलक का धैर्य और भारत की ऐतिहासिक जीत

भले ही मैच विवादों से भरा रहा, लेकिन अंततः क्रिकेट ही निर्णायक साबित हुआ। भारतीय टीम ने संयम दिखाते हुए जीत की ओर कदम बढ़ाया।

4.1. युवा बल्लेबाज़ का दबाव में प्रदर्शन

147 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को शुरुआती झटके लगे और टीम का स्कोर जल्द ही 10/2 हो गया। ऐसे कठिन समय में युवा बल्लेबाज़ तिलक वर्मा ने ज़बरदस्त धैर्य और परिपक्वता दिखाई । उन्होंने अपने विकेट को बचाए रखा और शिवम दुबे के साथ मिलकर 60 रनों की एक महत्वपूर्ण साझेदारी की, जिसने भारत को चेज़ में वापस ला दिया ।

तिलक वर्मा की 69* रनों की पारी दबाव में खेली गई एक मास्टरक्लास थी। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि शुरुआती विकेट गिरने के बावजूद टीम का रन रेट नियंत्रण में रहे और अंत तक वह क्रीज पर जमे रहे।

4.2. जीत का फिनिशिंग टच

तिलक वर्मा ने अंत तक एक छोर संभाले रखा, जबकि दूसरे छोर पर उनका साथ रिंकू सिंह ने दिया, जिन्हें हार्दिक पांड्या के चोटिल होने के कारण टीम में शामिल किया गया था । अंततः, रिंकू सिंह ने अंतिम ओवर में हारिस रऊफ की गेंद पर चौका मारकर भारत को 5 विकेट से जीत दिलाई, और टीम ने रिकॉर्ड-विस्तारित 9वां एशिया कप खिताब अपने नाम किया । यह जीत पाकिस्तान द्वारा मैदान पर किए गए तमाम उकसावों का खेल भावना से दिया गया सबसे माकूल जवाब था।

भाग 5: द फाइनल शोडाउन – मोहसिन नकवी और ट्रॉफी का बहिष्कार

यह वह क्षण था जिसने क्रिकेट प्रोटोकॉल के सभी नियमों को तोड़ दिया और 2025 एशिया कप फाइनल को हमेशा के लिए India vs Pakistan Asia Cup Final Controversy के नाम से परिभाषित कर दिया।

5.1. प्रस्तुति समारोह में अभूतपूर्व गतिरोध

भारत की जीत के बाद, प्रस्तुति समारोह लगभग एक घंटे तक विलंबित रहा । देरी का कारण अभूतपूर्व था: भारतीय टीम ने चैंपियन ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था।

यह बहिष्कार पूरी तरह से राजनीतिक था। भारतीय टीम ने ACC अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की । नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के प्रमुख होने के साथ-साथ पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री (Interior Minister) भी हैं। भारत का यह कड़ा रुख नकवी की राजनीतिक भूमिका और उनके कथित भारत विरोधी कदमों के खिलाफ़ एक सीधा विरोध था । नकवी ने इससे पहले सूर्यकुमार यादव पर भारत की जीत को भारतीय सशस्त्र बलों को समर्पित करने के लिए प्रतिबंध लगाने की भी मांग की थी ।

भारत ने मांग की कि यूएई क्रिकेट बोर्ड के उपाध्यक्ष खालिद अल ज़ारूनी ट्रॉफी प्रदान करें, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह विरोध पाकिस्तान के अधिकारियों के राजनीतिक पद के विरुद्ध है, न कि क्रिकेट प्रोटोकॉल के ।

5.2. नकवी का हठ और ट्रॉफी का हटना

भारतीय टीम की मांग के बावजूद, मोहसिन नकवी पीछे हटने को तैयार नहीं थे। उन्होंने जोर दिया कि वह ACC अध्यक्ष के रूप में ट्रॉफी खुद ही प्रदान करेंगे । जब भारतीय खिलाड़ियों ने साफ़ कर दिया कि वे नकवी के हाथों ट्रॉफी नहीं लेंगे, तो नकवी ने एक नाटकीय और अभूतपूर्व कदम उठाया। उन्होंने ट्रॉफी को प्रस्तुति पोडियम से हटाने का आदेश दिया ।

ट्रॉफी का मंच से गायब हो जाना, खेल के इतिहास में शायद पहली बार था जब विजेता टीम के मंच पर आने से पहले ही पुरस्कार हटा लिया गया।

यह विरोध और उसके बाद नकवी का जवाबी एक्शन यह दर्शाता है कि अंतर्राष्ट्रीय खेल मंचों पर अब राजनीतिक वीटो पावर का इस्तेमाल हो रहा है। भारत का इनकार नकवी की राजनीतिक साख को अस्वीकार करने का प्रयास था, और नकवी द्वारा ट्रॉफी को हटाने का कदम यह साबित करता है कि उन्होंने भी खेल की गरिमा से ऊपर राजनीतिक प्रतीकात्मकता को प्राथमिकता दी, जिससे भारत का शुरुआती विरोध सही साबित हुआ।

5.3. खाली हाथ का चैंपियन जश्न

ट्रॉफी छीन लिए जाने के बाद, भारतीय टीम ने एक यादगार और भावनात्मक कदम उठाया। उन्होंने खाली हाथों के साथ ही मंच पर जश्न मनाया, कॉन्फेटी उड़ाए गए और संगीत बजाया गया ।

कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पोस्ट-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी निराशा और गर्व दोनों व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “यह एक ऐसी चीज़ है जो मैंने क्रिकेट खेलने और फॉलो करने के इतने सालों में कभी नहीं देखी—एक चैम्पियन टीम को ट्रॉफी से वंचित कर दिया गया, वह भी इतनी मेहनत से जीती गई ट्रॉफी ।” उन्होंने भावनात्मक रूप से यह भी कहा कि, “मेरे लिए असली ट्रॉफी ड्रेसिंग रूम में मौजूद मेरे 14 साथी खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ हैं। यह असली यादें हैं जो मैं वापस ले जा रहा हूँ, और वे हमेशा मेरे साथ रहेंगी ।” यह संदेश स्पष्ट था: भले ही भौतिक ट्रॉफी छीन ली गई हो, लेकिन चैंपियन होने का दर्जा कोई नहीं छीन सकता।

भाग 6: विवाद के बाद की प्रतिक्रियाएँ और भविष्य की राह

इस अभूतपूर्व घटना के बाद दोनों तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएँ आईं, जिसने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट प्रशासन पर भी सवाल खड़े कर दिए।

6.1. पाकिस्तान कप्तान की निराशा और आरोप

पाकिस्तान के कप्तान सलमान आगा ने पूरे विवाद का ठीकरा भारतीय टीम पर फोड़ा। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ACC अध्यक्ष से ट्रॉफी लेने से मना करना प्रोटोकॉल के हिसाब से कैसे सही था? उन्होंने दोहराया कि इस पूरे विवाद की शुरुआत भारत ने ही की थी । आगा की टिप्पणियाँ भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों में बढ़ते तनाव को उजागर करती हैं, जहाँ खेल भावना और प्रोटोकॉल पर तीखी बहस छिड़ गई है।

6.2. BCCI की आगामी रणनीति और विरोध

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘बच्चापन’ (childish) और अस्वीकार्य करार दिया । BCCI ने तुरंत घोषणा की कि वे आगामी ICC बैठकों में मोहसिन नकवी के आचरण और ट्रॉफी को वापस लेने के कदम के खिलाफ़ कड़ा विरोध दर्ज करेंगे ।

BCCI की यह कार्रवाई दर्शाती है कि यह मामला द्विपक्षीय तनाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट प्रशासन के स्तर तक पहुँच गया है। इस विवाद का असर ICC और ACC के भीतर भारत-पाकिस्तान के क्रिकेट संबंधों पर आने वाले वर्षों में पड़ना तय है, क्योंकि BCCI ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह खेल के मंच पर राजनीतिक एजेंडे को थोपने के प्रयास को स्वीकार नहीं करेगा।

यहां India vs Pakistan Asia Cup Final Controversy से जुड़े मुख्य विवादों और उनके परिणामों का एक सारांश दिया गया है:

Table 2: India vs Pakistan Asia Cup Final Controversy: विवादों और प्रतिक्रियाओं का सारांश

विवाद/घटनाप्रतिक्रिया/परिणामप्रभावित पक्षबड़ी तस्वीर में महत्व
‘नो हैंडशेक’ पॉलिसीPycroft विवाद, ICC जांच।IND/PAK टीमें, Pycroftखेल प्रोटोकॉल का उल्लंघन, राजनीतिक तनाव का संकेत ।
‘गन’ और ‘क्रैश’ जेस्चरICC द्वारा रऊफ और SKY पर जुर्माना (30% मैच फीस)।हारिस रऊफ, SKYऑन-फील्ड उकसावे को ICC ने गंभीर माना ।
ट्रॉफी का बहिष्कारट्रॉफी मंच से हटा ली गई। भारत ने खाली हाथ जश्न मनाया।टीम इंडिया, मोहसिन नकवीराजनीतिक विरोध का चरम, खेल इतिहास में अभूतपूर्व घटना ।
पोस्ट-मैच विवादBCCI ने ICC में कड़ा विरोध दर्ज करने की बात कही।BCCI, PCB, ICCअंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट प्रशासन में संघर्ष का विस्तार ।

भाग 7: अंतिम विश्लेषण – क्रिकेट से ज़्यादा, यह शक्ति प्रदर्शन था

2025 एशिया कप फाइनल की कहानी मैदान पर भारत की शानदार जीत के साथ खत्म नहीं होती; यह कहानी एक ऐसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चरम पर खत्म होती है जिसने खेल को ओवरशैडो कर दिया। यह फाइनल इतिहास में सिर्फ इसलिए दर्ज नहीं होगा कि भारत ने नौवीं बार खिताब जीता, बल्कि इसलिए कि खेल को राजनीतिक दाँव-पेंच के आगे झुकना पड़ा।

यह पूरा टूर्नामेंट एक भू-राजनीतिक कथा बन गया था। हर एक्शन—चाहे वह साहिबजादा फरहान का उकसाने वाला इशारा हो, हारिस रऊफ का ‘क्रैश जेस्चर’ हो, या भारत का Trophy लेने से इनकार—एक कड़ा राजनयिक बयान था। भारत ने गेंद और बल्ले से अपनी श्रेष्ठता साबित की (खासकर कुलदीप यादव और तिलक वर्मा के दम पर), लेकिन Trophy को मंच से हटाना क्रिकेट की खेल भावना की एक बड़ी हार थी।

यह घटना भविष्य के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट्स, विशेष रूप से ICC आयोजनों के लिए एक गंभीर नज़ीर (precedent) स्थापित करती है। भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव का संदेश साफ था: भले ही उन्हें भौतिक ट्रॉफी से वंचित कर दिया गया हो, लेकिन जो मेहनत और एकजुटता टीम ने दिखाई, वही उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है ।

India vs Pakistan Asia Cup Final Controversy ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब दो चिर-प्रतिद्वंद्वी क्रिकेट खेलने उतरते हैं, तो दाँव पर सिर्फ़ खेल ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और राजनीतिक स्टैंड भी होता है। यह जीत भारतीय क्रिकेट के लिए शानदार थी, लेकिन इस विवाद ने यह सुनिश्चित किया कि यह जीत उतनी मधुर नहीं थी जितनी होनी चाहिए थी।

विज्ञापन

Sameer Mahajan

समीर महाजन, Fact Finding न्यू एज डिजिटल मीडिया के फाउंडर और संपादक हैं। उन्होंने प्रमुख समाचार चैनलों में संवाददाता के रूप में कार्य किया और वर्तमान में बड़े न्यूज़ नेटवर्क से जुड़े हैं। उनकी विशेषता राजनीति, अपराध, खेल, और सामाजिक मुद्दों में है। Fact Finding की स्थापना का उद्देश्य उन खबरों को उजागर करना है जो मुख्यधारा मीडिया में दब जाती हैं, ताकि सच्चाई और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

Join WhatsApp

Join Now

Join Arattai

Join Now

विज्ञापन