- Burhanpur Road Accident में युवक की मौत, लेकिन कार्रवाई सिर्फ मूर्तिकार और ट्रैक्टर चालक पर
- खराब सड़कों और भ्रष्ट सिस्टम पर सवाल, ठेकेदार और अधिकारियों पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई?
- कांग्रेस नेता अजय रघुवंशी बोले – प्रशासन छोटी मछली पकड़ता है, बड़े मगरमच्छ बच निकलते हैं
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में हाल ही में हुए Burhanpur Road Accident ने एक बार फिर प्रशासन की पोल खोल दी है। खराब सड़कों के कारण खंडवा के युवक शशांक जोशी की जान चली गई, लेकिन जिम्मेदारी लेने के बजाय प्रशासन ने सारा दोष मूर्तिकार और ट्रैक्टर ड्राइवर पर डालकर इतिश्री कर दी। बड़ा सवाल यह है कि मौत का असली जिम्मेदार कौन है – सड़क बनाने वाला ठेकेदार, नगर निगम या फिर प्रशासन?
जेल से छूटे लोग कर रहे पत्रकारिता
इस पूरे मामले की चर्चा तब और तेज हो गई जब कुछ ऐसे तथाकथित पत्रकारों ने इस हादसे पर खूब खबरें चलाईं, जिनका खुद का आपराधिक रिकॉर्ड है। ये वही लोग हैं जो पहले भ्रष्टाचार और उगाही के मामलों में जेल जा चुके हैं। सवाल उठता है कि जब तक कोई बेगुनाही साबित न हो, तब तक क्या ऐसे लोगों को पत्रकारिता करने की इजाजत होनी चाहिए? लेकिन जनसंपर्क विभाग और प्रशासन इस पर आंखें मूंदे बैठे हैं।
मूर्ति गिरी लेकिन दोषी कौन?
इस हादसे में कहा जा रहा है कि गणेश प्रतिमा का बैलेंस बिगड़ने से ट्रैक्टर पलट गया और शशांक जोशी की मौत हो गई। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मूर्तिकार और ट्रैक्टर चालक पर केस दर्ज कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि सड़कें अगर गड्ढों से भरी न होतीं तो क्या यह हादसा होता? असल जिम्मेदारी तो सड़क बनाने वाले ठेकेदार और नगर निगम की थी, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कांग्रेस नेता अजय रघुवंशी का बयान
इस मामले पर कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष अजय रघुवंशी ने साफ कहा कि पुलिस और प्रशासन छोटी मछली पकड़ने में माहिर है। उन्होंने सवाल उठाया – “जब इतनी मौतें खराब सड़कों की वजह से हो रही हैं, तब क्या कभी नगर निगम कमिश्नर या ठेकेदार पर कार्रवाई हुई? नहीं। लेकिन मूर्तिकार और ट्रैक्टर चालक को फंसा दिया जाता है।”
मूर्तियों की ऊंचाई पर नियम, लेकिन जिम्मेदार चुप
प्रशासन अब नियम-कायदे की आड़ लेकर कह रहा है कि 10 फीट से ऊपर की मूर्ति नहीं बननी चाहिए। लेकिन सवाल यह है कि जब हजारों बड़ी-बड़ी मूर्तियां शहर से बाहर जा चुकी थीं, तब किसी अधिकारी ने निरीक्षण क्यों नहीं किया? अगर मूर्ति की ऊंचाई ही इतनी बड़ी समस्या है तो जिम्मेदार अधिकारी भी बराबर के दोषी हैं। क्या उन पर हत्या का केस दर्ज नहीं होना चाहिए?
लालबाग रोड और शाहपुर रोड की हालत
स्थानीय लोगों का कहना है कि लालबाग रोड हो या शाहपुर रोड, हालत बेहद खराब है। जहां से मूर्तियां बाहर जा रही थीं, वहां गड्ढे ही गड्ढे हैं। नगर निगम और NHAI के अफसर जानते हुए भी सुधार नहीं करते। ऐसे में हादसे होना तय है। लोग साफ कह रहे हैं कि जब तक इन सड़कों की मरम्मत नहीं होगी, तब तक सिर्फ मूर्ति की साइज छोटा करने या ड्राइवर को दोषी ठहराने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
FIR की तैयारी
इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस नेता अजय रघुवंशी ने बताया कि वे जल्द ही एसपी को आवेदन देंगे और FIR दर्ज करने की मांग करेंगे। उनका कहना है कि कार्रवाई सिर्फ छोटे लोगों पर नहीं बल्कि बड़े मगरमच्छों पर भी होनी चाहिए। जब तक नगर निगम कमिश्नर, ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर केस दर्ज नहीं होगा, तब तक सड़क हादसे रुकने वाले नहीं हैं।
अपराधी छवि के लोग शांति समिति में
रघुवंशी ने एक और बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बुरहानपुर की शांति समिति में भी ऐसे लोग शामिल हैं जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। ये लोग खुद पर लगे आरोपों से बचने के लिए समाजसेवा और पत्रकारिता का नकाब पहनते हैं। यह जनता के साथ विश्वासघात है और प्रशासन को इस पर सख्त कदम उठाना चाहिए।
हादसे की असली वजह – लापरवाह सिस्टम
अगर गहराई से देखा जाए तो यह पूरा मामला सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। शहर की सड़कों पर गड्ढे भरे पड़े हैं, लेकिन अधिकारी और ठेकेदार पैसा खाने में व्यस्त हैं। हर साल करोड़ों रुपये सड़कों की मरम्मत के नाम पर खर्च दिखाए जाते हैं, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस रहते हैं।
जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती?
जब भी कोई हादसा होता है, छोटे लोगों को पकड़कर केस दर्ज कर दिया जाता है। मूर्तिकार, ट्रैक्टर चालक, छोटे व्यापारी – यही प्रशासन के निशाने पर रहते हैं। लेकिन असली जिम्मेदार, यानी ठेकेदार और बड़े अधिकारी, हमेशा बच निकलते हैं। यही वजह है कि दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं लेता।
सरकार को लेना होगा बड़ा फैसला
लोगों की राय है कि सरकार को अब सिर्फ औपचारिक बयानबाजी से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई करनी होगी। रोड की हालत सुधारनी होगी, जिम्मेदार अधिकारियों पर केस दर्ज करना होगा और भ्रष्टाचार पर लगाम लगानी होगी। वरना हर साल गणेश विसर्जन जैसे मौकों पर ऐसे हादसे होते रहेंगे और निर्दोष लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे।
जनता का सवाल
लोग पूछ रहे हैं – “क्या सड़कों की हालत दुरुस्त किए बिना एक्सीडेंट रुक सकते हैं?” जवाब साफ है – बिल्कुल नहीं। जब तक गड्ढों को भरा नहीं जाएगा और रोड की मरम्मत नहीं होगी, तब तक छोटे नियम-कानून से फर्क नहीं पड़ेगा।
जिम्मेदार कौन?
Burhanpur Road Accident सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सिस्टम की नाकामी का आईना है। मौत शशांक जोशी की हुई, लेकिन सवाल ठेकेदार और अधिकारियों पर है। प्रशासन छोटे लोगों पर केस दर्ज करके अपनी जिम्मेदारी से बच सकता है, लेकिन जनता सब देख रही है। वक्त आ गया है कि सरकार और प्रशासन बड़े मगरमच्छों पर भी कार्रवाई करे, वरना ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
















